तेल अवीव: नक्शों पर ये गांव अब भी दिखते हैं. जमीन पर कुछ नहीं बचा. दक्षिणी लेबनान में, इजरायली सेना ने पूरे समुदायों को नक्शे से मिटा दिया है. जहां कभी घर, दुकानें और पीढ़ियों की यादें थीं, वहां अब सिर्फ धूल और मलबा बचा है. जब दुनिया का ध्यान अमेरिका-ईरान के इस्लामाबाद वार्ता पर था और कूटनीति किसी ठोस नतीजे की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही थी, तब जमीन पर हकीकत कुछ और ही बता रही थी.
बातचीत की मेज से दूर, इजरायली सेनाएं एक सुनियोजित अभियान चला रही थीं, जिसमें लेबनान के बड़े इलाकों में नागरिकों के घरों को ध्वस्त किया जा रहा था. द गार्डियन के अनुसार, इजरायली सैनिकों ने घरों के अंदर बारूद लगाया और फिर रिमोट कंट्रोल से बड़े पैमाने पर विस्फोट कर दिए, जिससे सीमा के साथ लगे गांवों के बड़े हिस्से पूरी तरह से समतल हो गए. तायबेह, नाकौरा और देइर सिरयान में इन कार्रवाइयों का वीडियो फुटेज भी सामने आया है.
इसके अलावा लेबनानी मीडिया ने आस-पास के अन्य गांवों में भी ऐसी ही तोड़फोड़ की खबरें दी हैं, हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है. लेकिन पैटर्न साफ दिख रहा है कि अलग-अलग जगहों पर हमले नहीं, बल्कि पूरे-पूरे इलाकों के घरों को एक साथ मिटाया जा रहा है. इजरायल ने कहा कि सीमा के पास के सभी घर नष्ट कर दिए जाएंगे.
ये तोड़फोड़ इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ के बयान के बाद हुई, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से सीमा के पास के गांवों में सभी घरों को नष्ट करने की बात कही थी. उन्होंने गाजा में इस्तेमाल किए गए मॉडल का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लेबनान की सीमा के पास के गांवों में सभी घर नष्ट कर दिए जाएंगे, ठीक उसी मॉडल के अनुसार जो गाजा के राफाह और बेइत हानून में इस्तेमाल किया गया था, ताकि उत्तरी इजरायल के निवासियों के लिए सीमा के पास का खतरा हमेशा के लिए खत्म हो जाए.
गाजा में भी इसी तरह की कार्रवाई की आलोचना हुई थी, खासकर राफाह में, जहां लगभग 90 प्रतिशत घरों को मलबे में बदल दिया गया था. इजरायल का दावा है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है, क्योंकि ये समूह नागरिक इलाकों से ऑपरेशन चलाता है. लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पूरे गांवों को इस स्तर पर नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमा लांघ सकता है. अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार, नागरिक घरों को तब तक नष्ट नहीं किया जा सकता जब तक कि साफ-साफ और प्रत्यक्ष सैन्य जरूरत न हो और पूरे गांवों के मामले में यह शर्त पूरी नहीं होती.
दक्षिणी लेबनान में लंबे समय तक रहना चाहता है इजरायल
इजरायल ने संकेत दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा बनाए रखना चाहता है और लितानी नदी तक सुरक्षा क्षेत्र बनाने की योजना बना रहा है. इस योजना के तहत, विस्थापित निवासियों को तब तक वापस नहीं आने दिया जाएगा जब तक इजरायली अधिकारी यह न कह दें कि सीमा क्षेत्र सुरक्षित हो गया है. इससे लंबे समय तक विस्थापन की आशंका बढ़ गई है.