बोकारो (झारखंड): आठ महीने पहले लापता हुई 18 वर्षीय एक छात्रा का कंकाल जंगल में मिलने के बाद पुलिस को बड़े स्तर पर झटका लगा है. बोकारो के पिंड्राजोरा थाने के सभी 28 पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. निलंबित पुलिस कर्मचारियों में 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं.
क्या था पूरा मामला?
पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र की रहने वाली इस युवती की मां ने अगस्त 2025 में अपनी बेटी के अपहरण की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी. लेकिन पुलिस की ओर से लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. जब मामले में कोई प्रगति नहीं दिखी तो पीड़िता की मां ने झारखंड हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने इस याचिका को बहुत गंभीर माना और पिछले हफ्ते बोकारो एसपी से लेकर राज्य के डीजीपी तक को तलब किया. कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर बोकारो एसपी को कड़ी फटकार लगाई थी.
कोर्ट की फटकार के बाद दो दिन में खुलासा
कोर्ट की फटकार के बाद बोकारो एसपी हरविंदर सिंह ने सिटी डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की. इस टीम ने महज दो दिन की जांच में पूरे मामले का खुलासा कर दिया. तकनीकी सबूतों, कॉल डिटेल्स और अन्य जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि लापता छात्रा का संपर्क दिनेश कुमार महतो नाम के एक युवक से था. पूछताछ में दिनेश ने कबूल किया कि युवती उस पर शादी करने का दबाव बना रही थी.
इसी बात से तंग आकर उसने 21 जुलाई 2025 को बहाने से उसे सुनसान जगह पर ले जाकर चाकू मारकर हत्या कर दी और शव को जंगल की झाड़ियों में छिपा दिया. शनिवार को आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से युवती के कंकाल के अवशेष बरामद किए. साथ ही हत्या में इस्तेमाल चाकू, घटना के समय के कपड़े, चार मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण सबूत भी मिले. पुलिस अब कंकाल का डीएनए टेस्ट कराने जा रही है.
पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
SIT की जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि स्थानीय थाने की पुलिस ने न सिर्फ मामले की जांच में लापरवाही की, बल्कि आरोपी को बचाने की कोशिश भी की. कुछ पुलिसकर्मियों पर आरोपी को संरक्षण देने के बदले पैसे लेने के भी आरोप लगे हैं. इन्हीं गंभीर आरोपों के आधार पर बोकारो एसपी ने थाने के सभी 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया. यह घटना झारखंड पुलिस के लिए बड़ी शर्मिंदगी का विषय बन गई है.