डेस्क : ईरान और अमेरिका के बीच में तनाव जारी है. सीजफायर को लेकर चली रही वार्ता के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर दो दिन के दौरे पर यूएई पहुंचे. यूएई पहुंचने के बाद जयशंकर ने राष्ट्रपति से मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी. राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के बीच में मीटिंग भी हुई. मीटिंग में डॉ. जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच में संयुक्त अरब अमीरात ने भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा सुनिश्चित की है, इसके लिए हम शुक्रिया अदा करते हैं. डॉ. प्रसाद ने व्यावसायिक और ऊर्जा संबंधित चर्चाएं की, जहां व्यवसायिक साझेदारी बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई.
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स हैंडल पर लिखा कि "अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति से मिलकर बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं. पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए शुक्रिया. भारत यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए उन्हें धन्यवाद"
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया और कहा कि यूएई के अपने दौरे की शुरुआत भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात के बाद हुई. पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद के बीच में उनकी भलाई और सुरक्षा को लेकर की जा रही कोशिशें के बारे में जानकारी लीं. उन्होंने मुश्किल समय में स्थानीय समाज में योगदान की सराहना की और कहा कि भारतीय समुदाय की भलाई सुरक्षा करने के लिए यूएई सरकार के समर्थन बेहद ही काबिले-तारीफ है.
दो दिन के दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री ने यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से भी मुलाकात की. पश्चिमी एशिया में तनाव के बाद बदलते हालात को लेकर चर्चा की, इसके असर को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच में बातचीत हुई. विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच में व्यावसायिक व राजनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर भरोसा जताया है.
भारत के ऊर्जा आपूर्तिकर्ता में संयुक्त अरब अमीरात और कतर है. ऐसे में सबसे ज्यादा युद्ध से ऊर्जा प्रभावित हुआ है. दोनों देशों के बीच में मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद ऊर्जा को लेकर बातचीत हुई है. एशिया संघर्ष के प्रभाव के बारे में आकलन किया गया है. भारत का ईंधन का सबसे पांचवा बड़ा आपूर्तिकर्ता यूएई है. कच्चे तेल का आयात लगभग 6 प्रतिशत यहीं से आयात होता है. इसके साथ ही एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों में तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है. यहीं वजह है कि विदेश मंत्री ने यहां पर दौरा किया और बड़े नेताओं से मिलकर व्यावसायिक राजनीति को मजबूत करने को लेकर बातचीत की.