अमेरिका के ब्लॉकेड से चीन की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में, बीजिंग ने ट्रंप को साफ शब्दों में दी चेतावनी

Amanat Ansari 13 Apr 2026 04:59: PM 2 Mins
अमेरिका के ब्लॉकेड से चीन की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में, बीजिंग ने ट्रंप को साफ शब्दों में दी चेतावनी

बीजिंग: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकाबंदी लगाने का ऐलान कर दिया है. वहीं ईरान ने भी तेल सप्लाई को लेकर जवाबी चेतावनी दी है. इस बीच ट्रंप की तरफ से चीन पर लगाए गए टैरिफ के खतरे का जवाब देते हुए चीन ने ईरान का खुलकर साथ दिया है और अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि उसके मामलों में दखल न दें.

ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर चीन ईरान को सैन्य मदद पहुंचाता है तो उसके खिलाफ 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. चीन ने इस धमकी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि बीजिंग मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रख रहा है और दुनिया में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हमारे जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में नियमित रूप से आते-जाते रहते हैं. ईरान के साथ हमारे व्यापारिक और ऊर्जा संबंधित समझौते हैं, जिनका हम सम्मान करते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी हमारी इन गतिविधियों में दखलअंदाजी न करे. होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण है और यह मार्ग हमारे लिए खुला है.”

ट्रंप की इस नाकाबंदी से चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. अगर यहां यातायात रुकता है तो चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है.

अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ट्रंप के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों पर नाकाबंदी लागू हो जाएगी. यह नाकाबंदी सभी देशों के जहाजों पर बिना भेदभाव के लागू होगी, लेकिन गैर-ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को इससे छूट रहेगी.

ट्रंप की नीति से चीन पहले भी प्रभावित होता रहा है. वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी नियंत्रण से भी चीन को नुकसान हुआ था, क्योंकि वह वहां का बड़ा खरीदार है. अब ईरान के मामले में भी यही स्थिति है.

इस पूरे घटनाक्रम से लगता है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने के साथ-साथ चीन को भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बना रहा है. चीन अब ईरान के समर्थन में खुलकर सामने आ गया है, क्योंकि उसकी अपनी ऊर्जा आपूर्ति दांव पर है. स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है.

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