कोविड वैक्सीन पर जर्मन संसद में पूर्व फाइजर टॉक्सिकोलॉजिस्ट की गवाही वायरल... एलन मस्क ने भी किया समर्थन

Amanat Ansari 13 Apr 2026 02:56: PM 2 Mins
कोविड वैक्सीन पर जर्मन संसद में पूर्व फाइजर टॉक्सिकोलॉजिस्ट की गवाही वायरल... एलन मस्क ने भी किया समर्थन

बर्लिन: एलन मस्क ने दावा किया है कि कोविड-19 वैक्सीन की उनकी दूसरी डोज़ उन्हें लगभग मार ही डाल रही थी. उन्होंने जर्मनी की संसद में एक पूर्व फाइजर वैज्ञानिक की गवाही को X पर शेयर करते हुए सवाल किया कि यह खबर दुनिया भर के मीडिया की सुर्खियों में क्यों नहीं है. 19 मार्च 2026 को जर्मनी में कोविड एन्क्वेट कमीशन के सामने डॉ. हेल्मुट स्टेर्ट्ज़ ने गवाही दी.

वे फाइजर के यूरोपीय टॉक्सिकोलॉजी सेंटर के पूर्व हेड थे और 2007 में कंपनी से रिटायर हो चुके थे . यानी कोविड वैक्सीन विकसित होने से 14 साल पहले. दक्षिणपंथी पार्टी AfD के निमंत्रण पर उन्होंने कहा कि Pfizer-BioNTech की mRNA वैक्सीन (कॉमिरनाटी) को मंजूरी देते समय 10 जरूरी प्रीक्लिनिकल सेफ्टी स्टडीज को छोड़ दिया गया था.

स्टेर्ट्ज़ ने दावा किया कि वैक्सीन को मंजूरी से पहले कोई कार्सिनोजेनिसिटी स्टडी नहीं की गई और प्रजनन संबंधी विषाक्तता परीक्षण भी अपर्याप्त थे. उन्होंने जर्मनी की दवा सुरक्षा एजेंसी पॉल-एहरलिच-इंस्टीट्यूट के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि कॉमिरनाटी वैक्सीन के बाद 2,133 मौतें रिपोर्ट हुई हैं. उन्होंने अमेरिका के एक पुराने अनुमान (VAERS अंडर-रिपोर्टिंग) को लागू करते हुए इस संख्या को 30 गुना बढ़ाकर लगभग 60,000 मौतों का अनुमान लगाया.

स्वास्थ्य मंत्री ने खारिज किया आरोप

जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री कार्ल लाउटरबाख ने स्टेर्ट्ज़ के दावों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट की गई मौतें वैक्सीन से सिद्ध रूप से जुड़ी मौतें नहीं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेर्ट्ज़ द्वारा इस्तेमाल किया गया 30 गुना मल्टीप्लायर अमेरिका के हार्वर्ड पिलग्रिम हेल्थ केयर स्टडी से लिया गया है, जो VAERS सिस्टम की अंडर-रिपोर्टिंग पर आधारित था. लेकिन वह स्टडी कभी पूरी नहीं हुई और CDC ने खुद चेतावनी दी है कि VAERS डेटा से कारण साबित नहीं किया जा सकता. जर्मनी की रिपोर्टिंग प्रणाली अलग होने के कारण इस अनुमान को सीधे जर्मनी पर लागू नहीं किया जा सकता.

वैज्ञानिक साक्ष्य क्या कहते हैं?

यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) ने कहा है कि कॉमिरनाटी वैक्सीन उस समय के मानकों के अनुसार मूल्यांकित की गई थी और इसके फायदे जोखिमों से कहीं ज्यादा थे. लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जिन पश्चिमी यूरोपीय देशों में वैक्सीनेशन दर ज्यादा थी, वहां कुल मौतें कम हुईं. स्टैनफोर्ड मेडिसिन की दिसंबर 2025 की रिसर्च में भी सामने आया कि कोविड संक्रमण खुद mRNA वैक्सीन की तुलना में हृदय संबंधी समस्याएं (मायोकार्डाइटिस) करीब 10 गुना ज्यादा पैदा कर सकता है.

स्टेर्ट्ज़ 2025 में ही “Die Impf-Mafia” (द वैक्सीन माफिया) नामक किताब प्रकाशित कर चुके थे, जिसमें उन्होंने mRNA वैक्सीन को अवैध बताया था. गवाही मात्र पांच मिनट चली और सुनवाई का हॉल भरा हुआ नहीं था, लेकिन क्लिप पिछले हफ्ते के अंत तक करोड़ों लोगों तक पहुंच गई. एलन मस्क ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, ''मुझे अपनी दूसरी डोज़ के बाद लगा जैसे मैं मर रहा हूं.'' उन्होंने पूछा कि यह गवाही और 60,000 मौतों का अनुमान मीडिया में क्यों नहीं है.

यह घटना 1999 की फिल्म “द इंसाइडर” की याद दिलाती है, जिसमें एक टोबैको इंडस्ट्री के वैज्ञानिक ने अपने नियोक्ताओं द्वारा छिपाई गई सच्चाई उजागर की थी. हालांकि, यहां असली सवाल यह है कि तेजी से विकसित वैक्सीन की प्रीक्लिनिकल टेस्टिंग पर उठे सवाल वैध हैं या नहीं, लेकिन 60,000 मौतों का विशिष्ट अनुमान अभी तक किसी पीयर-रिव्यूड स्टडी या आधिकारिक जांच पर आधारित नहीं है. बुन्‍देश्‍ताग की गवाही सार्वजनिक रिकॉर्ड पर है, लेकिन वैज्ञानिक बहस अभी भी जारी है.

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