लकड़े से चूल्हे पर पका मिड-डे मील, हेडमास्टर सस्पेंड, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी राहत

Amanat Ansari 13 Apr 2026 05:24: PM 2 Mins
लकड़े से चूल्हे पर पका मिड-डे मील, हेडमास्टर सस्पेंड, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी राहत

Varanasi Mid-Day Meal Controversy: वाराणसी के एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर को LPG सिलेंडर की कमी के चलते लकड़ी के चूल्हे पर मिड-डे मील बनवाने के मामले में निलंबित कर दिया गया था. अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनके निलंबन पर रोक लगा दी है. मामला उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से जुड़ा है. स्कूल में गैस सिलेंडर खत्म हो जाने के बाद हेडमास्टर ने बच्चों के मध्याह्न भोजन को लकड़ी के चूल्हे पर पकाने का फैसला लिया.

इसके बाद उन्हें विभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया. हेडमास्टर ने इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की. जस्टिस मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच पूरी होने तक हेडमास्टर पर निलंबन लागू नहीं रहेगा. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल ने कोई गैर-कानूनी काम नहीं किया.

वे सिर्फ अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे. गैस की भारी कमी के कारण उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचा था. उन्होंने कहा कि सस्पेंशन ऑर्डर अस्पष्ट है और बिना ठोस आधार के जारी किया गया है. अगर आरोप सही भी मान लिए जाएं तो भी इतनी बड़ी सजा देने की जरूरत नहीं थी. राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने स्वीकार किया कि स्कूल को केवल दो गैस सिलेंडर दिए गए थे और वाकई कमी थी. लेकिन फिर भी उन्होंने गाइडलाइंस का उल्लंघन मानते हुए लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल किया.

सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ता को एक हफ्ते के अंदर चार्जशीट जारी कर दी जाएगी और पूरी जांच दो महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया कि एक सप्ताह के अंदर हेडमास्टर को चार्जशीट दे दी जाए. जांच दो महीने के अंदर पूरी की जाए. याचिकाकर्ता को जांच में पूरा सहयोग करना होगा.

इसी तरह का एक मामला मध्य प्रदेश में भी सामने आया था. वहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने LPG की कमी को लेकर फेसबुक पर वीडियो पोस्ट किया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उस मामले में भी सस्पेंशन पर रोक लगा दी. कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना गंभीर सोच-विचार या बाहरी दबाव के किसी कर्मचारी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सस्पेंड नहीं किया जा सकता.

दोनों मामलों में अदालतों ने साफ संकेत दिया है कि सरकारी कर्मचारियों को ‘सस्पेंशन सिंड्रोम’ की तरह रूटीन तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता. सस्पेंशन की शक्ति का इस्तेमाल सोच-समझकर और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही करना चाहिए.

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