नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता विफल होने के बाद सोमवार को बाजार खुलते ही भारी गिरावट दर्ज की गई. रुपये और सेंसेक्स दोनों में जबरदस्त कमजोरी देखने को मिली. रुपया 49 पैसे टूट गया, वहीं सेंसेक्स में करीब 1600 अंकों की गिरावट आई. ईरान से बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. यही वजह है कि डॉलर मजबूत हुआ है और रुपये पर भारी दबाव बना हुआ है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने रुपये को कमजोर कर दिया है और इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी राहत मिलने की संभावना कम है.
डॉलर की बढ़ गई है मांग
सोमवार को बाजार खुलने के बाद रुपया 49 पैसे गिरकर प्रति डॉलर 93.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. रुपये में गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 7.28% बढ़कर 102.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. तेल की बढ़ती कीमतों के कारण डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपया कमजोर हुआ और अपने निचले स्तर पर पहुंच गया. वहीं, डॉलर इंडेक्स 0.38% बढ़कर 98.81 पर पहुंच गया. निवेशकों के 8 लाख करोड रुपए डूब गए.
भारत पर पड़ेगा गहरा असर
शेयर बाजार के लिए यह सोमवार "ब्लैक मंडे" साबित हुआ. घरेलू बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया. सेंसेक्स 1600 अंकों से ज्यादा टूटकर 75,949.52 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 468.85 अंक गिरकर 23,581 है. बाजार में इस गिरावट से निवेशकों का भरोसा भी डगमगा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान-अमेरिका तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका भारत पर गहरा असर पड़ेगा.
आयात पर निर्भर है ऊर्जा स्रोत
भारत ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में वैश्विक अशांति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. आने वाले दिनों में यदि हालात नहीं सुधरे तो महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है. आम लोगों पर ज्यादा असर देखने को मिलेगा.