तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बढ़ते सार्वजनिक विवाद के बीच पोप लियो XIV के समर्थन में आवाज उठाई. उन्होंने पोप के खिलाफ अपमान की निंदा की और धार्मिक एकजुटता का आह्वान किया. यह दुर्लभ हस्तक्षेप भू-राजनीतिक सीमाओं को पार करते हुए सामने आया है.
एक्स पर एक पोस्ट में पेजेश्कियन ने कहा, ''परम पावन पोप लियो XIV, मैं आपके महानुभाव के प्रति हुए अपमान की निंदा करता हूं. शांति और भाईचारे के पैगंबर ईसा मसीह का अपमान किसी भी स्वतंत्र व्यक्ति के लिए स्वीकार्य नहीं है. मैं आपको अल्लाह की महिमा (Glory by Allah) की कामना करता हूं.'' यह संदेश पहले फारसी में पोस्ट किया गया था, जिसे कुछ मिनट बाद डिलीट कर अंग्रेजी में दोबारा पोस्ट किया गया.
ट्रंप ने पोप पर ईरान और विदेश नीति को लेकर हमला बोला
पेजेश्कियन का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने पोप लियो पर तीखा और व्यक्तिंगत हमला किया. उन्होंने उन्हें ''अपराध पर कमजोर'' और ''विदेश नीति में भयानक'' बताया, साथ ही ईरान के प्रति नरम रवैया अपनाने और ''रैडिकल लेफ्ट'' से जुड़े होने का आरोप लगाया. रिपोर्टरों से बातचीत और ट्रूथ सोशल पर पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वे ''ऐसे पोप को नहीं चाहते जो ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत देना ठीक समझता हो''.
उन्होंने पोप की अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों (ईरान और वेनेजुएला सहित) का विरोध करने की भी आलोचना की. साथ ही दावा किया कि पोप का चुनाव अमेरिकी राजनीति से जुड़ा है और कहा कि ''अगर मैं राष्ट्रपति नहीं होता तो लियो वेटिकन में नहीं होते''. ये टिप्पणियां पोप के उस चेतावनी के कुछ दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने संघर्ष को बढ़ावा देने वाली ''सर्वशक्तिमानता की भ्रांति'' की निंदा की थी और संयम तथा बातचीत की अपील की थी.
‘युद्ध की पागलपन’ के खिलाफ चेतावनी
पोप लियो, जो वर्तमान में अफ्रीका दौरे पर हैं, ने अपनी आलोचना पर जोर दिया. अल्जीरिया में बोलते हुए उन्होंने ''नियोकोलोनियल'' शक्तियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की और शक्ति तथा धन से प्रेरित प्रभुत्व की चेतावनी दी. उन्होंने कहा, ''भविष्य उन लोगों का है जो शक्ति से अंधे नहीं होते.'' उन्होंने युद्ध और व्यापक सैन्यीकरण का विरोध दोहराया. ट्रंप के जवाब में पोप ने संयमित लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, ''मैं उनके साथ बहस में नहीं पड़ना चाहता, लेकिन युद्ध के खिलाफ जोरदार आवाज उठाता रहूंगा.'' यह टिप्पणी अल्जीयर्स जाने वाले अपने विमान में की गई.
ट्रंप के ‘ईसा’ पोस्ट ने विवाद को और बढ़ाया
पोप पर हमले के कुछ घंटों बाद ट्रंप ने एक AI-जनरेटेड इमेज शेयर की, जिसमें उन्हें ईसा मसीह जैसी शक्ल में दिखाया गया था — वस्त्र पहने, दिव्य प्रकाश निकलता हुआ और एक व्यक्ति को ''ठीक'' करते हुए. इसने विवाद को और तीव्र कर दिया. यह पोस्ट राजनीतिक और धार्मिक हलकों में व्यापक आलोचना का शिकार हुई और बाद में बैकलैश के चलते डिलीट कर दी गई. आलोचकों ने इस इमेज को ईशनिंदा (Blasphemous) माना और इसे अमेरिकी प्रशासन तथा कैथोलिक चर्च के बीच बढ़ते दरार का संकेत बताया.
कूटनीतिक-धार्मिक विवाद में दाखिल
पेजेश्कियन का बयान इस विवाद में तीसरा आयाम जोड़ता है, जो शुरू में युद्ध नीति पर केंद्रित था लेकिन अब धार्मिक रंग ले चुका है. ईरान और वेटिकन के बीच राजनयिक संबंध तो हैं और कभी-कभी शांति की अपील पर सहमति भी रही है, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति द्वारा किसी सक्रिय भू-राजनीतिक विवाद के दौरान सीधे पोप का सार्वजनिक समर्थन करना असामान्य है और दोनों देशों के बीच सामान्य संबंधों का हिस्सा नहीं है. यह घटनाक्रम दर्शाता है कि ईरान युद्ध अब पारंपरिक युद्ध से आगे निकलकर धार्मिक नेतृत्व को भी खींच रहा है और वाशिंगटन, तेहरान तथा वेटिकन के बीच खाई को और चौड़ा कर रहा है.