India-US-Israel Relations: जब एक महाशक्ति अपना वर्चस्व खोने लगे, तो वो उसे बनाए रखने के लिए कुछ भी कर सकता है. बीते कुछ सालों से चीन-रूस-भारत की तिकड़ी जिस हिसाब से उसकी शक्तियों को चैलेंज कर रही थी, वो अमेरिका को इतना चुभा कि उसने अंदर ही अंदर एक ऐसी चाल चली कि पूरी दुनिया हिल गई.
हमला भले ही ईरान पर हुआ, लेकिन इसका असर भारत-चीन,रूस-ताइवान सब पर दिखा. पर ये असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल और गैस के रूप में नहीं, बल्कि ये असर दिखा इन देशों की रफ्तार पर ब्रेक की साजिश रूप में. इन देशों के मार्केट को कमजोर करने की साजिश के रूप में. वो कैसे इसे समझने के लिए दिग्गज अर्थशास्त्री अनस अलहाजी के बयान को समझना होगा.
जो एनर्जी सेक्टर के बड़े एक्सपर्ट माने जाते हैं, ये इंडिया टूडे को दिए इंटरव्यू में कहते हैं कि युद्ध की वजह से एशिया के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा संकट आया है, मई महीने में ग्लोबल इकोनॉमी क्रैश हो सकती है. फिलहाल दुनिया की जरूरत का 35 फीसदी और एशिया की जरूरत का 90 फीसदी हीलियम होर्मुज के रास्ते आता है, और ये रास्ता बंद होने से चीन-ताइवान को भारी नुकसान हो रहा है.
अब हीलियम ऐसा प्रोडक्ट है, जो आपके मोबाइल फोन से लेकर आपकी कार के कूलिंग, MRI मशीन, रॉकेट और वेल्डिंग तक में होता है. अब अगर ये नहीं आएगा तो समझिए कितना नुकसान होगा.
बीते दिनों भारत के दिग्गज बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने कहा था हम एक दिन में 600 इलेक्ट्रिक व्हीकल बेच रहे हैं, जिससे कंपनी और भारत की अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा हो रहा था, लेकिन अब हीलियम की आपूर्ति रुकने से इस पर भी असर पड़ेगा, यहां तक कि आपके हाथ में जो फोन है, जिस लैपटॉप से आप काम करते हैं, वो सबकुछ महंगा हो सकता है. MRI तक की फीस महंगी हो सकती है, क्योंकि मशीन को ठंडा करने के लिए हीलियम की जरूरत पड़ती है.
फिलहाल सबसे ज्यादा हीलियम गैस कतर, रूस और अमेरिका में है. कतर की फैक्ट्री पर पहले से ही ईरान अटैक कर रहा है. जिसे बंद होने से लंबे वक्त तक इसकी सप्लाई प्रभावित हो सकती है, रूस पर पहले से ही तमाम प्रतिबंध लगे हुए हैं, और अमेरिका अपना मार्केट दुनियाभर में बना सकता है. इसीलिए युद्ध का ये सीक्रेट एजेंडा जैसे ही सामने आया. ये चर्चा तेज हो गई कि ट्रंप के लिए ये लड़ाई कहीं पर निगाहें और कहीं पर निशाना की तरह हो चुकी है.
इसीलिए ये लड़ाई लंबी चली तो अभी महंगा तेल बेचकर जो अमेरिका अपना खजाना भर रहा है, वो बाद में हीलियम गैस बेचकर भी लाखों-करोड़ों डॉलर कमाएगा,और इससे नुकसान सिर्फ इतना ही नहीं होगा कि मार्केट में अमेरिका का दबदबा फिर बढ़ेगा, बल्कि भारत जो सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में काम कर रहा है, पीएम मोदी और सीएम योगी लगातार मेक इन इंडिया और सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों को लेकर काम कर रहे हैं, उसे भी बड़ा झटका लग सकता है.
यही वजह है कि ये युद्ध अब दुनिया को सिर्फ तेल-गैस की चिंता के लिहाज से नहीं बल्कि पूरी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिहाज से भी महंगी पड़ती नजर आ रही है. जिसे नहीं रोका गया तो ये मानकर चलिए कि आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती है. भारत-चीन और रूस जो तेजी से अमेरिका के डॉलर को चुनौती दे रहे थे, उनकी अर्थव्यवस्था को भी झटका देने की साजिश शुरू हो गई. जिसे नाकाम करने तैयारियां तीनों देशों ने न सिर्फ शुरू कर दी है, बल्कि इस बार अमेरिका को तगड़ा जवाब देने की तैयारी है.