नेपाल के नए प्रधानमंत्री और जेनजी आंदोलन से निकले नेता बालेन शाह क्या भारत की नीतियों को कॉपी कर रहे हैं, उनके कुछ फैसलों में इसकी झलक अभी से दिखने लगी है, जिससे नेपाल के नए उदय की कहानी लिखी जा सकती है, जिसे समझने के लिए उनके शुरुआती 48 घंटों के 8 फैसलों को समझना होगा...
फैसला नंबर 1- जेनजी आंदोलन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. आंदोलन में मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया.
फैसला नंबर 2- 2006 से 2026 तक के नेताओं और ऑफिसर की संपत्तियों की जांच होगी, नेपाल राष्ट्र बैंक 100 दिनों के भीतर डिजिटल एसेट रजिस्ट्री बनाएगी.
फैसला नंबर 3- नेपाल में एक ऐसा सिस्टम तैयार होगा, जो संदिग्ध लेन-देन को तुरंत पकड़ लेगा और एजेंसियों को अलर्ट भेजेगा, ताकि जनता का पैसा सुरक्षित रहे.
फैसला नंबर 4- अब नेपाल में छात्र राजनीति पूरी तरह बैन हो चुकी है, 60 दिनों के अंदर राजनीतिक पार्टियों से जुड़े सभी छात्र संगठनों को अपने ऑफिसर कॉलेज-यूनिवर्सिटी से हटाने होंगे.
फैसला नंबर 5- अगले 90 दिनों में छात्रों की समस्या सुनने के लिए स्टूडेंट काउंसिल या वॉइस ऑफ स्टूडेंट जैसा संगठन बनेगा, जिसका राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं होगा.
फैसला नंबर 6- ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए अब नेपाली नागरिकता की शर्त खत्म होगी, ताकि किसी की पढ़ाई न रुके, सभी कॉलेज-यूनिवर्सिटी को समय पर रिजल्ट जारी करना होगा.
फैसला नंबर 7- नेपाल में चल रहे ऑक्सफोर्ड, पेंटागन और सेंट जेवियर्स जैसे विदेशी नाम वाले शिक्षण संस्थानों को इसी साल अपना नाम बदलकर कोई नेपाली नाम रखना होगा.
फैसला नंबर 8- 5वीं क्लास तक के लिए बच्चों के लिए परीक्षा खत्म कर दी गई है, उन्हें वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली के जरिए पास किया जाएगा.
ये वो फैसले हैं, जिनसे बालेन शाह का विजन दिखता है. इसी के साथ वो मोदी सरकार की तरह ही 100 दिन का विजन भी पेश करते हैं. जिसके मुताबिक नेपाल में कई बड़े बदलाव होने की उम्मीद है...जैसे हिंदुस्तान में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मोदी की सरकार आई थी, और भ्रष्टाचार पर चोट के लिए कई बड़े फैसले लिए गए, वैसा ही कुछ आने वाले दिनों में नेपाल में भी दिख सकता है..लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के हालात के बीच बालेन शाह की सरकार नेपाल को मजबूत कैसे करेगी...क्योंकि
मिडिल ईस्ट के युद्ध प्रभावित देशों में करीब 20 लाख नेपाली काम करते हैं
ये जो पैसा वहां से कमाकर भेजते हैं, वो नेपाल की जीडीपी का 26 फीसदी है
नतीजा नेपाल में महंगाई बढ़ने लगी है, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने लगे हैं...तो इसे कंट्रोल करने के लिए बालेन शाह क्या करते हैं, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं...इसके अलावा भारत से भी नेपाल के रिश्ते एक वक्त में काफी अच्छे रहे हैं, इसलिए बालेन शाह को भारत से भी संतुलित नीति साधकर चलनी होगी..अब तक ये तय नहीं हुआ है कि वो सबसे पहले किस देश की यात्रा पर जाएंगे, क्योंकि इससे उनकी विदेश नीति की प्राथमिकता का अंदाजा लगेगा...फिलहाल उनका फोकस उन युवाओं के भरोसे पर खरा उतरने की है, जिन्होंने जेनजी आंदोलन से वहां की सत्ता को उखाड़ फेंका, उन्हें अपना नेता माना... इसीलिए प्रधानमंत्री बनते ही वो सबसे पहले उन 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान करते हैं, जिन्होंने इस आंदोलन के दौरान जान गंवाई थी.....अब युवाओं के रोजगार और उनकी पढ़ाई को लेकर भी बालेन शाह से बड़े ऐलान की उम्मीद वहां की जनता कर रही है...