Lok Sabha Election 2024 के बाद भी नहीं शांत हुआ अग्निवीर योजना का मुद्दा, हो रहा घमासान

Global Bharat 07 Jun 2024 02:28: PM 2 Mins
Lok Sabha Election 2024 के बाद भी नहीं शांत हुआ अग्निवीर योजना का मुद्दा, हो रहा घमासान

अग्निवीर योजना (Agniveer Yojana) पर भयंकर विवाद हो रहा है. लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) के नतीजों में एनडीए गठबंधन (NDA) को भले ही पूर्ण बहुमत मिला है, लेकिन भाजपा (BJP) पूर्ण बहुमत लाकर सबसे बड़ी पार्टी बनने में पीछे रह गई. इस चुनाव में अग्निवीर योजना एक बड़ा मुद्दा रहा. जदयू नेता केसी त्यागी ने अग्निवीर योजना की समीक्षा की बात कही.

एक बार फिर अग्निवीर योजना को लेकर विरोध तेज़ हो गया है. विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर जदयू की मांग का समर्थन किया है. बता दें कि अग्निवीर योजना के तहत 17 साल से 23 साल की उम्र के लोगों को चार साल के लिए उनकी पसंद की सैन्य सेवा में भर्ती किया जाएगा. इस कार्यकाल के बाद, 25% अग्निवीरों को बरकरार रखा जाएगा और शेष 75% को नागरिक जीवन में लौटने की अनुमति दी जाएगी.

जदयू नेता केसी त्यागी ने की समीक्षा की मांग

जदयू नेता केसी त्यागी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि मतदाताओं के हिस्से में ग्निवीर योजना को लेकर नाराजगी रही है. हमारी पार्टी चाहती है कि इस योजना की कमियों और खामियों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए. क्योंकि जनता इस पर सवाल उठा रही है. हालांकि किसी त्यागी ने यह भी कहा कि जदयू ने बिना शर्त एनडीए और बीजेपी को समर्थन दिया है.

चिराग पासवान ने कहा योजना पर विमर्श जरूरी

वहीं चिराग पासवान ने भी अग्निवीर योजना को लेकर अपनी बात रखी है. चिराग पासवान ने कहा है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि इस योजना का कितना लाभ मिला है. उन्होंने कहा है कि एनडीए एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां पर हम सभी अबनी बात रखते हैं. इसलिए इस योजना पर विमर्श जरूरी है. उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं कि वह हमेशा किसी भी डिस्कशन के लिए तैयार रहते हैं.

अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल

वहीं समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि अग्निवीर योजना जल्द से जल्द समाप्त होनी चाहिए और सेना में भर्ती होने की उम्र पार कर चुके इच्छुक युवाओं को फिर से मौका मिलना चाहिए. सरकार बनाने को लेकर उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में जब गिनती होती है तो आस और उम्मीद कभी खत्म नहीं होती है. इंडिया गठबंधन बहुमत से काफी दूर है, क्योंकि उसके खाते में 234 सीटें आई हैं. लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सीटों की जरूरत होती है. हालांकि, फिर भी उसने सरकार बनाने की आस नहीं छोड़ी है.

Recent News