नई दिल्ली: जगद्गुरु रामभद्राचार्य का एक नया क्लिप इन दिनों सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. इस बार उन्होंने अंग्रेजी के शब्द “WIFE” की फुल फॉर्म बताई और सीधे कहा, ''W- Wonderful, I- Instrument, F- For, E- Enjoy , यानी वाइफ का मतलब है आनंद लेने का अद्भुत उपकरण. मतलब पश्चिमी नजरिए में स्त्री सिर्फ भोग की वस्तु है.
फिर स्वामी जी ने अपनी बात को भारतीय परंपरा से जोड़ा. बोले, ''हमारी संस्कृति में उसे पत्नी कहते हैं जो पति के साथ यज्ञसंयोगे, यानी पति के साथ यज्ञ में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होती है. हमारे यहां हनीमून अलग से नहीं मनाया जाता, यहां तो हर रोज हनीमून होता है, चांद हमेशा मीठा ही रहता है. यहां नारी का उपयोग भोग के लिए नहीं, योग के लिए होता है.''
यह वीडियो 25 जुलाई 2025 को उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड हुआ था और देखते-ही देखते लाखों व्यूज पार कर गया. दरअसल यह पहली बार नहीं है. अप्रैल 2023 में भी स्वामी जी ने एक कथा में Wife की दूसरी फुल फॉर्म बताई थी, उन्होंने कहा था, W- Without, I-Information, F- Fights और E- Everytime.
यानी बिना बताए हर समय लड़ने वाली. उस दिन तो उन्होंने यहां तक कह दिया था, ''भगवान करे मेरे सात दुश्मनों को भी Wife न मिले, आठवें को भले मिल जाए!'' दोनों ही साल में दो अलग-अलग फुल फॉर्म, दोनों में एक बात कॉमन – Wife को नीचा दिखाना और पत्नी को ऊंचा उठाना. अब सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है.
एक तरफ उनके भक्त इसे पाश्चात्य संस्कृति पर करारा तमाचा बता रहे हैं. दूसरी तरफ लोग सवाल उठा रहे हैं, जगद्गुरु जैसे व्यक्ति से क्या यही अपेक्षा थी कि वे स्त्री को इंस्ट्रूमेंट फॉर इंजॉय कहकर उसकी गरिमा को और कम करें? और फिर उसी सांस में भारतीय नारी को यज्ञ की सहभागी बताकर ऊंचा दिखाएं? दोनों में स्त्री को पुरुष के लिए ही परिभाषित किया जा रहा है – कभी भोग के लिए, कभी योग के लिए.
कई लोग लिख रहे हैं, ''स्वामी जी संस्कृत के महापंडित हैं, लेकिन Wife की फुल फॉर्म तो अंग्रेजों ने भी कभी नहीं लिखी. ये तो अपनी तरफ से बनाई गई बातें हैं, फिर भी करोड़ों लोग ताली पीट रहे हैं.'' फिलहाल वीडियो पर लाइक्स और गुस्सा दोनों बरस रहे हैं.
एक तरफ भक्तों का हुजूम चिल्ला रहा है जय श्री राम, सनातन संस्कृति जिंदाबाद, दूसरी तरफ युवा लड़कियां और लड़के कमेंट बॉक्स में आग उगल रहे हैं- स्त्री न भोग की वस्तु है, न यज्ञ की सहायक सामग्री. वो अपने आप में पूर्ण है.