Jayaprakash Narayan International Centre: साल 2012 में अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने जो सपना देखा था, उसे अब योगी आदित्यनाथ पूरा करेंगे, जिस पर अखिलेश को खुश होना चाहिए था, पर वो अब भी योगी से नाराज हैं, और कह रहे हैं मेरे सपनों का जेपी सेंटर अगर आप बेचना चाहते हैं तो बताइए हम खरीदने को तैयार हैं. लेकिन सवाल है अखिलेश यादव 1 हजार करोड़ लाएंगे कहां से, चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति ही करीब 42 करोड़ है. तो इसका भी जवाब अखिलेश देते हैं, लेकिन उस पर आएं उससे पहले जानिए आखिर ये JPNIC है क्या, जिसके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते.
JPNIC का पूरा नाम है जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र, जिसकी शुरुआत होती है साल 2012 से, जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री हुआ करते थे, मुलायम सिंह पार्टी के कर्ता-धर्ता थे, तब लोकनायक जयप्रकाश लखनऊ के गोमतनीगर के विपिनखंड में करीब 18.64 एकड़ जमीन पर इसकी नींव रखी जाती है. इसका मकसद था लखनऊ में एक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कॉन्फ्रेंस के लिए एक आधुनिक बिल्डिंग बनाना और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की यादों को संजोना. इसमें
“2,000 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, 107 कमरों वाला लग्जरी होटल, जिसमें जिम, स्पा, सैलून, रेस्तरां सब हों. वर्ल्ड लेवल का स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, 591 गाड़ियों के लिए सात मंजिला मल्टी लेवल पार्किंग, राज्य स्तर का ऑडिटोरियम और जेपी के जीवन से जुड़ा एक म्यूजियम बनना था.”
लेकिन तय समय सीमा जो 2-3 साल थी, उसके पूरा होने के बाद भी काम नहीं हुआ. कहा जाता है पैसे की कमी और तमाम दिक्कतों की वजह से काम नहीं बना. साल 2017 में जब योगी मुख्यमंत्री बने तो इस प्रोजेक्ट की जांच के आदेश दिए गए, ये पता किया गया कि जिस प्रोजेक्ट में करीब 200-300 करोड़ खर्च होने थे, उसकी लागत लगातार कैसे बढ़ती गई, और अब तक 821 करोड़ रुपये कैसे खर्च हो गए हैं. जांच के बीच काम रोक दिया गया, अखिलेश ने आरोप लगाया 80 फीसदी काम पूरा हो गया है, फिर भी सरकार ने इसे रोक दिया, सरकार इसे बेचना चाहती है. साल 2024 में तो अखिलेश जब यहां माल्यार्पण करने जा रहे थे तो बिल्डिंग के सामने टिन शेड लगने की तस्वीरें भी सामने आई और किसी तरह अखिलेश अंदर पहुंच पाए थे. जिसके बाद खूब सियासी हंगामा हुआ. अब 3 जुलाई 2024 को योगी सरकार ने इस सेंटर को LDA यानि लखनऊ विकास प्राधिकऱण को सौंपने का फैसला किया, और अखिलेश सरकार ने जो सोसायटी बनाई थी, इसकी देखरेख के लिए उसे भी भंग कर दिया गया. कहा जा रहा है जो पैसे अब तक खर्च हुए हैं, वो LDA के लिए लोन होंगे, और बाकी के काम में उसे करीब 150 करोड़ खर्च करने होंगे, इस हिसाब से ये प्रोजेक्ट 1 हजार करोड़ का हो जाएगा. अखिलेश कहते हैं चंदा करना पड़ा तो करेंगे लेकिन सरकार अगर इसे देना चाहे तो हमें दे दें, हमारी इससे भावनाएं जुड़ी है.
जबकि सपा सांसद अवधेश प्रसाद इसे लोकनायक जयप्रकाश नारायण का अपमान बताते हैं. हालांकि यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक इस काम के लिए योगी सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं और कहते हैं इसमें जनता का एक भी पैसा नहीं लगेगा. हम इसे थर्ड पार्टी को देंगे.