ओवैसी बतिया रहे थे कानून, जूनियर शाह ने 5 मिनट में ठंडा कर दिया वक्फ वाला जुनून

Global Bharat 30 Sep 2024 03:38: PM 3 Mins
ओवैसी बतिया रहे थे कानून, जूनियर शाह ने 5 मिनट में ठंडा कर दिया वक्फ वाला जुनून

अभिषेक चतुर्वेदी

ये तस्वीरें अहमदाबाद में हुई जेपीसी यानि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की मीटिंग है, जहां दिल्ली से 20 बड़े नेता मीटिंग के लिए पहुंचे थे, सफेद-पायजामा कुर्ता पहने जो शख्स बैठे हैं, ये हैं हर्ष संघवी, पूरा गुजरात इन्हें जूनियर शाह के नाम से जानता है, गुजरात के गृहमंत्री भी हैं, लेकिन इस मीटिंग में बैठे थे गुजरात सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर, जबकि इनके सामने बैठे हैं, AIMIM के सांसद और जेपीसी के सदस्य असदुद्दीन ओवैसी, जिनका चेहरा बता रहा है कि इनके पास संघवी की बातों का कोई जवाब नहीं बचा, इन दोनों के बीच इस मीटिंग में इतनी तगड़ी बहस हुई कि दिल्ली तक इसकी चर्चा पहुंच गई, कोई कह रहा था संघवी ने ओवैसी की मुस्लिम प्रेम की पोल खोलकर रख दी तो किसी ने कहा बैरिस्टर ओवैसी को जूनियर शाह से भिड़ने से पहले सोचना चाहिए था. दोनों के बीच बहस किस बात को लेकर हुई, ये जब हर्ष संघवी से पूछा गया तो उन्होंने कहा ये नहीं बता सकते, क्योंकि जेपीसी की मीटिंग के कुछ कायदे कानून हैं.

लेकिन हमने जब जानकारी जुटाई तो पता चला वो चौंका देने वाला था, हर्ष संघवी ने दरअसल ओवैसी को वक्फ बोर्ड के उस मुद्दे पर लपेट लिया, जिसे लेकर ओवैसी खुलकर कहते हैं वक्फ खत्म नहीं होने देंगे. दरअसल हर्ष संघवी ने जैसे ही ये कहा कि वक्फ संशोधन बिल से सभी धर्मों को समान हक मिलेगा, ओवैसी तुरंत गुस्से में बोल उठे इससे मुस्लिमों के धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार का हनना होगा, ओवैसी का इतना बोलना था कि हर्ष संघवी ने कागजों का वो पुलिंदा ओवैसी के सामने पटक डाला, जिसमें 5 बड़े उदाहरण लिखे थे कि कैसे वक्फ बोर्ड ने पीएम मोदी के जिले तक को नहीं छोड़ा.

ओवैसी- अगर वक्फ गलत क्लेम करता है, तो ट्रिब्यूनल इसीलिए बने हैं. सूरत के केस में आखिर नगर निगम के पक्ष में ही फैसला हुआ.

हर्ष संघवी- सूरत नगर निगम के केस में जो दो बार सुनवाई का खर्चा हुआ, वो जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी नहीं तो क्या है. असंतुलित पावर को बैलेंस करना जरूरी है.

ओवैसी- भरूच जिले में एक कर्मचारी की जालसाजी को पूरे वक्फ बोर्ड की जालसाजी आप नहीं कह सकते.

हर्ष संघवी- हमने ये नहीं कहा गलती वक्फ बोर्ड की है, लेकिन एक तरफा न्याय नहीं चल सकता. गुजरात में 40 हजार संपत्तियां वक्फ के अधीन नोटिफाइड हैं, जिनमें से कइयों का विवाद आज भी चल रहा है. संघवी के जवाब सुनकर ओवैसी पसीना पोंछ पाते, उससे पहले ही संघवी ने 5 ऐसे उदाहरण दिए, जिसने ओवैसी के दावों की पोल खोलकर रख दी.

  • उदाहरण नंबर 1- 1867 से जिस इमारत का इस्तेमाल सूरत नगर निगम कर रही थी, उसे साल 2015 में वक्फ की संपत्ति के तौर पर रजिस्टर्ड करा दिया गया. मामला ट्रिब्यूनल में गया तब जाकर नगर निगम को वापस कब्जा मिला.
  • उदाहरण नंबर 2- दाहोद के पास ताला गांव में वन भूमि पर कब्जा कर दरगाह बना दी गई. जबकि ये जमीन केन्द्र सरकार ने संरक्षित की हुई थी.
  • उदाहरण नंबर 3- मेहसाणा में बीके सिनेमा की बिल्डिंग दरगाह और कब्रिस्तान का दावा किया गया. इसे वक्फ की संपत्ति घोषित करने की मांग हुई.  
  • उदाहरण नंबर 4- वडोदरा जहां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आते हैं, वहां के वडू गांव में पटेल मंजीभाई नानजीभाई ने जो जमीन खरीदी, उसे वक्फ ने बिना किसी नोटिस के अपना बता दिया.
  • उदाहरण नंबर 5- भरूच जिले में जटाली ट्रस्ट और वक्फ कर्मचारियों ने मिलकर न सिर्फ फर्जी आदेश जारी किए, बल्कि पैसे के लालच में वक्फ की संपत्ति भी बेच दी.


इतने उदाहरण गिनवाने के बाद भी ओवैसी ने वक्फ की पैरवी नहीं छोड़ी, और इस काम में उनका साथ दे रहे थे, गुजरात के ही एक मुस्लिम विधायक, जिनका नाम है इमरान खेड़ा वाला, उन्होंने 14 संशोधन प्रस्ताव पेश किए, जिस पर जेपीसी यानि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को विचार करना है लेकिन हर्ष सांघवी ने जिस हिसाब से ओवैसी को जवाब दिया, उसे सुनकर आप समझ गए होंगे यूं ही इन्हें जूनियर शाह नहीं कहा जाता. मोदी के गृहराज्य में जाकर ओवैसी मोदी-शाह के बनाए कानून पर सवाल उठा रहे थे तो पहले संघवी ने जवाब दिया और फिर सोमनाथ मंदिर के पास की जमीन से अवैध कब्जा हटवाकर ये संदेश भी दे दिया कि गलत परंपरा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

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