भोपाल : देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री और बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय का बयान चर्चा में आ गया है. 26 अगस्त को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि चीनी का महंगा होना अच्छा है, खूब महंगी हो जाए. चीनी सेहत के लिए अच्छी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद चीनी नहीं खाते और लोगों को भी इसके सेवन को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए.
दरअसल, इस समय देश में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. केंद्र सरकार के मुताबिक अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 20 जुलाई को करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 प्रति किलो हो गई. 26 अगस्त को सरकारी आंकड़ों के अनुसार औसत खुदरा कीमत करीब 65.05 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.
चीनी की कीमतों में उछाल के पीछे त्योहारी मांग, बाजार की गतिविधियां और आपूर्ति से जुड़ी परिस्थितियां बताई जा रही हैं. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार देश में तत्काल चीनी की कमी नहीं है और मौजूदा तेजी में सट्टेबाजी तथा बाजार की धारणा की भी भूमिका है. कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को स्थिर करना है.
विजयवर्गीय के बयान का दूसरा पहलू स्वास्थ्य से जुड़ा है. विशेषज्ञ लंबे समय से ज्यादा मात्रा में अतिरिक्त चीनी के सेवन को मोटापा, दांतों की समस्या और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से जोड़ते रहे हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि चीनी का महंगा होना अपने आप स्वास्थ्य नीति का समाधान है. ऐसे में महंगाई के बीच मंत्री का चीनी महंगी हो जाए वाला बयान सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है.