नई दिल्ली: पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाते हुए, उसके नागरिकों को जारी होने वाले SAARC वीजा को रद्द कर दिया है. आइए जानते हैं क्या होता है SAARC वीजा. बताते चलें कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) एक ऐसा मंच है जो दक्षिण एशिया के आठ देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका को एक साथ लाता है.
इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक विकास और लोगों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देना है. इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है SAARC वीजा छूट योजना (SAARC Visa Exemption Scheme), जिसे आमतौर पर SAARC वीजा के रूप में जाना जाता है. यह योजना 1992 में शुरू की गई थी और इसका मुख्य लक्ष्य SAARC देशों के नागरिकों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क को आसान बनाना है.
SAARC वीजा क्या है?
SAARC वीजा छूट योजना के तहत कुछ खास श्रेणियों के लोगों को एक विशेष यात्रा दस्तावेज (Special Travel Document) दिया जाता है, जिसके जरिए वे SAARC देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. यह दस्तावेज एक वीजा स्टिकर के रूप में होता है, जिसकी वैधता आमतौर पर एक वर्ष की होती है. यह योजना 1988 में इस्लामाबाद में हुए चौथे SAARC शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू की गई थी, जब नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के महत्व को समझा.
किन लोगों को मिलता है SAARC वीजा?
इस योजना के तहत 24 विशेष श्रेणियों के लोगों को वीजा छूट दी जाती है. इनमें शामिल हैं...
इन श्रेणियों को समय-समय पर SAARC के मंत्रिपरिषद द्वारा समीक्षा की जाती है ताकि जरूरत के अनुसार बदलाव किए जा सकें. SAARC चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI) जैसी संस्थाएं व्यवसायियों के लिए इस वीजा की सिफारिश करती हैं.
SAARC वीजा का महत्व
SAARC वीजा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह क्षेत्रीय एकता को बढ़ावा देता है. यह योजना व्यापार, पर्यटन, संस्कृति और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आसान बनाती है. उदाहरण के लिए, एक व्यवसायी को भारत से बांग्लादेश या नेपाल में व्यापारिक बैठक के लिए बार-बार वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती. इसी तरह, खिलाड़ी या पत्रकार क्षेत्रीय आयोजनों में आसानी से हिस्सा ले सकते हैं. यह योजना खासकर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो नियमित रूप से SAARC देशों की यात्रा करते हैं.