नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है. वकील ब्रजेश सिंह ने 24 सितंबर को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की जानबूझकर अनदेखी की है. उन्होंने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की संबंधित धाराओं और नियमों का हवाला दिया.
किन फैसलों का उल्लंघन बताया?
वकील का कहना है कि टीएन शेषन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है. मुख्य चुनाव आयुक्त बराबर अधिकार वालों में प्रथम हैं, सर्वेसर्वा नहीं. फैसलों को आयोग के फैसले माना जाना चाहिए, न कि सिर्फ चेयरमैन के. अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार (2023) के फैसले का भी हवाला दिया गया, जिसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग के महत्व पर जोर दिया गया था. वकील का आरोप है कि अन्य चुनाव आयुक्तों को नजरअंदाज कर फैसले जारी करना सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून की अवहेलना है.
यह कदम इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए फैसलों पर आपत्ति जताई थी. ये आपत्तियां फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची संबंधी मुद्दों से जुड़ी थीं. अब अटॉर्नी जनरल की अनुमति का इंतजार है. यह मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आंतरिक मतभेदों पर चल रही बहस को और तेज कर सकता है.