नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की याचिका पर अंतरिम आदेश में संशोधन कर दिया है. कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए 5 लाख रुपए के मुआवजे और प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी है, लेकिन छात्रा अकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने के फैसले को यथावत रखा है.
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि रोक केवल हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 27 से 33 तक सीमित है. इनमें मेधा रूपम पर सख्त टिप्पणियां और 5 लाख रुपए मुआवजे का आदेश शामिल है. हाईकोर्ट ने यह राशि उनकी सैलरी से काटकर अकृति चौधरी को देने का निर्देश दिया था.
हाईकोर्ट का मूल फैसला
2 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अकृति चौधरी (दिल्ली विश्वविद्यालय की 25 वर्षीय इतिहास स्नातक) की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने इसे राज्य द्वारा “गढ़ा गया” मामला बताया और तुरंत रिहाई का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने मेधा रूपम और अन्य अधिकारियों की आलोचना करते हुए कहा था कि ऐसी निरंकुश कार्रवाई उत्तर प्रदेश को ऑरवेलियन डायस्टोपिया बना सकती है. कोर्ट ने अधिकारियों से कहा था कि उनकी निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मेधा रूपम की ओर से और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने राज्य सरकार की ओर से दलील दी. अकृति चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस पेश हुए.
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर मामला 7 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दिया है. संशोधित आदेश के अनुसार, अकृति चौधरी की हिरासत रद्द करने का हाईकोर्ट का फैसला अभी भी प्रभावी है. यह मामला नोएडा मजदूरों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें अकृति चौधरी समेत कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था.