लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जाली सिक्कों का मामला सामने आने के बाद अलर्ट पर आई पुलिस को राजधानी लखनऊ में बड़ी कामयाबी मिली है। लखनऊ की नाका हिंडोला थाना पुलिस ने अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले एक संगठित जाली नोट (फेक करेंसी) सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के समीप स्थित झोपड़पट्टी इलाके से दो सगे भाइयों—मोहम्मद मुस्तकीम (24) और मोहम्मद सुलेमान (26) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
आरोपियों के पास से 30 हजार रुपये के नकली नोट और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट 1 लाख रुपये के असली नोटों के बदले 2.5 लाख रुपये के नकली नोट बाजार में खपा रहा था। दोनों भाई मूल रूप से लखनऊ के हसनगंज थाना क्षेत्र के निवासी हैं, लेकिन इनका पूरा नेटवर्क पारिवारिक स्तर पर दिल्ली से संचालित हो रहा था।
नाका हिंडोला थाना प्रभारी विवेक कुमार चौधरी के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मुख्य सरगना दोनों भाइयों का चचेरा भाई हारून है, जो दिल्ली में बैठकर नेटवर्क चलाता है। हारून अपने संपर्कों के जरिए दिल्ली से लखनऊ नकली नोटों की खेप भेजता था। वही खरीदार तलाशता था और डिलीवरी का समय व स्थान तय करता था।
डील को सुरक्षित रखने के लिए गिरोह बेहद शातिराना कोडवर्ड का इस्तेमाल करता था। आरोपी ग्राहक से सीधा संपर्क नहीं रखते थे; हारून उन्हें व्हाट्सऐप पर लोकेशन भेजता था और खरीदार की पहचान के लिए उसकी 'शर्ट का रंग' बताता था। बताए गए रंग के कपड़े पहने व्यक्ति को जाली नोट सौंपकर दोनों भाई असली रकम ले लेते थे। वे अपना तय कमीशन काटकर बाकी पैसे ऑनलाइन माध्यम से दिल्ली में बैठे हारून को भेज देते थे। दोनों भाई सप्ताह में दो बार लखनऊ के विभिन्न इलाकों में डिलीवरी करते थे।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 179 और 180 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। मोबाइल फोन से ग्राहकों की सूची खंगाली जा रही है, जबकि मास्टरमाइंड हारून की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम दिल्ली रवाना की गई है।