छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के पास मुगल बादशाह औरंगजेब की समाधि पर रविवार को पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है. दक्षिणपंथी संगठनों की धमकियों और कुछ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बाद यह समाधि ढहाना चाहती है. पुलिस ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से समाधि पर सीधे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और छत्रपति संभाजीनगर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर खुल्ताबाद में स्थित समाधि स्थल पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लागू रहेंगे. उधार नागपुर में हिंसा की खबर है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यहां दो पक्षों में पत्थरबाजी हो गई.
उधर, मुगल बादशाह औरंगजेब की समाधि की तरफ सुरक्षा बढ़ा दी गई है. हालांकि वाहनों पर कोई प्रतिबंध नहीं है. खुल्ताबाद के पुलिस निरीक्षक धनंजय फराटे ने बताया कि समाधि की ओर जाने वाले वाहनों पर नजर रखने के लिए यातायात को धीमा करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं. चौबीसों घंटे निगरानी के लिए राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) की एक टुकड़ी तैनात की गई है. छह पुलिसकर्मी लगातार समाधि पर तैनात हैं.
आज शिवसेना के कुछ नेताओं ने हथियार लहराए. राज्य विधान परिषद में विपक्ष के नेता शिवसेना (यूबीटी) के अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार लोगों को बेवकूफ बना रही है और आग में घी डालने का काम कर रही है. दानवे ने कहा, "केंद्र सरकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के माध्यम से मकबरे के रखरखाव के लिए धन मुहैया कराती है. फिर भी, केंद्र और राज्य सरकारें कुछ तत्वों को मकबरे को तोड़ने के बारे में बोलने के लिए उकसाती हैं."
कैबिनेट मंत्री और शिवसेना के पदाधिकारी संजय शिरसाट ने पलटवार करते हुए विपक्षी दलों को चुनौती दी कि अगर उन्हें लगता है कि मकबरे को हटाने से इतिहास नष्ट हो जाएगा तो वे औरंगजेब की मूर्तियां स्थापित करें. शिरसाट ने कहा कि महाराष्ट्र में औरंगजेब के मकबरे के लिए कोई जगह नहीं है. दानवे के सहयोगी और जालना से कांग्रेस के सांसद कल्याण काले ने आरोप लगाया कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले इस मुद्दे को तूल दिया गया. काले ने कहा, "कब्र सालों से वहां है. कई लोग इसे अब देख रहे हैं क्योंकि चुनाव नजदीक हैं."