गाजियाबाद के एक महंत है यती नरसिंहानंद, जो पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कुछ ऐसा बोलते हैं कि महाराष्ट्र से लेकर यूपी तक हंगामा खड़ा हो जाता है. यूपी के बुलंदशहर में जुम्मे की नमाज के बाद सड़कों पर भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ती है, पुलिस समझाती है तो हाथों में पत्थर लेकर फेंकने लगती है, लेकिन सिंघम आईपीएस श्लोक कुमार समय रहते ऐसा इंतजाम करते हैं कि 8 पत्थरबाज धर लिए जाते हैं, तुरंत मेरठ से लेकर गाजियाबाद और मुरादाबाद तक के लिए अलर्ट जारी कर दिया जाता है, योगी खुद कई जगहों की निगरानी करते हैं, आदेश देते हैं नवरात्रि पर शांति व्यवस्था किसी भी हाल में नहीं बिगड़नी चाहिए, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा नहीं हो पाता, बल्कि वहां से जो तस्वीरें आती है, उसे देखकर आप भी यही पूछेंगे कि ये पुलिस थाना है या पत्थरखाना.
4 सितंबर की रात करीब 8.30 बजे तक महाराष्ट्र के इस नागपुरी गेट पुलिस थाने में सबकुछ ठीक था, लेकिन 8.30 बजे के बाद एक भीड़ आती है, थाना प्रभारी से कहती है नरसिंहानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कीजिए, थाना प्रभारी समझाते हैं FIR पहले से दर्ज है, जांच चल रही है, लोग चले जाते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद बड़ी तैयारी के साथ आते हैं और थाने पर पत्थऱ फेंकने लगते हैं, पुलिस किसी तरह अपनी जान बचाती है, हर तरफ अफरातफरी मच जाती है, करीब 1200 लोगों की भीड़ थाने को चारों तरफ से घेर लेती है, ऐसा लगता है जैसे ये किसी को नहीं छोड़ेंगे, पुलिस कमिश्नर नविन चंद्र रेड्डी जब मोर्चा संभालते हैं, वहां स्पेशल फोर्स उतारते हैं, तब जाकर भीड़ तितर-बितर होती है.
लेकिन ओवैसी ऐसे प्रदर्शनकारियों पर सवाल उठाने की बजाय सीधा मोदी-योगी से सवाल पूछते हैं, और कहते हैं आपके लोग जो ऐसी बातें करते हैं, क्या आपको इससे खुशी मिलती है. क्या ओवैसी जैसे नेताओं को ये संदेश नहीं जारी करना चाहिए कि हाथों में पत्थर मत उठाओ, जुबान पर ऐसे नारे मत लाओ, जिससे मुश्किलें बढ़े. जब कोई शहजाद थाने को घेरता है, कोई ताहिर दिल्ली में माहौल खराब करवाता है तो फिर मौलाना उसके परिवारों को क्यों नहीं समझाया जाता, ये भी बड़ा सवाल है, आज हालत ये हो गई है कि एक तरफ यति नरसिंहानंद के शिष्य अपने गुरु का समर्थन करते हैं, तो दूसरी तरफ मौलाना हुजुर की शान में गुस्ताखी पर भड़क उठते हैं.
यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक और हिमाचल प्रदेश से लेकर राजस्थान तक से जैसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, उसे देखकर चिंता होना लाजिमी है, यूपी में अकेले योगी आदित्यनाथ ने इतनी सख्ती की हुई है कि कोई पत्थऱ छोड़िए कंकड़ उठाने की भी हिमाकत नहीं करता, जो करता है, उसका इलाज क्या होता है, आप तस्वीरों में देख लीजिए, पत्थर फेंकने वाले आरोपी हों या महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले मोईन खान जैसे सपा के कुछ शोहदे, सब सलाखों के पीछे हैं, लेकिन बाकी राज्यों में हालात अलग हैं और जब-जब हालात बिगड़ते हैं, योगी की डिमांड बढ़ती है.
चाहे वो बिहार हो या बंगाल, हर जगह योगी की डिमांड बढ़ रही है, क्योंकि बुलडोजर के पहिए के नीचे न जाने कितने माफियाओं का भौकाल दम तोड़ गया, न जाने कितने गुर्गे ऑपरेशन लंगड़ा के शिकार होकर चलने-फिरने लायक भी नहीं बचे, ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या मध्य प्रदेश के मोहन यादव सरकार की तरह महाराष्ट्र सरकार को भी योगी मॉडल अपनाना होगा, और जैसे शहजाद के आलीशान महल पर कुछ घंटों में बुलडोजर चला तो उसके सारे समर्थक बिलबिला उठे, कोई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया तो कोई सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर रोने लगा, क्या ऐसा ही कोई इलाज महाराष्ट्र सरकार को ढूंढना होगा, क्योंकि महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से लगातार डरा देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं.