CM योगी ने सिटीनुमा चीज बजाकर क्यों की खास पूजा, 90 फीसदी लोग नहीं जानते सच

Abhishek Chaturvedi 14 Jan 2025 02:40: PM 3 Mins
CM योगी ने सिटीनुमा चीज बजाकर क्यों की खास पूजा, 90 फीसदी लोग नहीं जानते सच

लखनऊ: सीएम योगी आदित्यनाथ ये कौन सी पूजा कर रहे हैं, वो बार-बार एक सीटीनुमा चीज बजाते हैं, जो काले रंग के धागे में बंधी हुई उनके गले में लटकी है, उनके बगल में खड़े संत भी उनकी की हुई प्रक्रिया को दोहराते हैं, जिसे देखने के बाद कई लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर ये कौन सी पूजा है, आम तौर पर योगी आदित्यनाथ जब चलते हैं, तो उनके गले में ये चीज नजर नहीं आती, लेकिन हर साल मकर संक्रांति के मौके पर योगी आदित्यनाथ विशेष तरीके से अनुष्ठान करते नजर आते हैं, जहां सबसे पहले नेपाल के राजघराने से बनकर आई खिचड़ी चढ़ाई जाती है, उसके बाद सीएम योगी और श्रद्धालु खिचड़ी चढ़ाकर संक्रांति का त्यौहार मनाते हैं. लेकिन सवाल है ये सीटीनुमा चीज आखिर है क्या, क्या ये कोई खास पूजा है.

सनातन धर्म में भगवान को प्रणाम करने के अलग-अलग तरीके तो हैं ही, हर किसी की पूजा अलग-अलग होती है, साधू-संत विशेष पूजा करते हैं, अघोरी तंत्र साधना करते हैं, तो वहीं नागा साधुओं की अपनी पूजा है, लेकिन योगी आदित्यनाथ जो कर रहे हैं, उसकी कहानी क्या है, इसे समझने के लिए योगी के संत बनने का किस्सा सुनना होगा, जिसके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते.

नाथ संप्रदाय का नियम कहता है...कोई भी व्यक्ति जब संत बनने आता है, सबसे पहले उसकी चोटी काटकर धूणे में डाल दी जाती है. जो चोटी काटते हैं वो चोटी गुरु या शिखा गुरू कहलाते हैं. उसके बाद कर्ण छेदन संस्कार होता है, कर्ण छेदन करने वाले को बाना गुरु कहा जाता है. इसमें हर व्यक्ति को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है. उसके बाद संत बनने गए व्यक्ति को भगवा लिबास मिलता है. और वो भगवा के अलावा फिर कोई दूसरा वस्त्र धारण नहीं करता, इसीलिए योगी हमेशा भगवा कपड़े में रहते हैं. भगवा धारण करने के बाद एक गुरु उपदेश देते हैं, गोपनीय मंत्र देते हैं, उसके बाद सबसे आखिर में लंगोटी गुरु से संस्कार और ज्ञान मिलते हैं.

इस दौरान हर योगी को 4 चीजें मिलती हैं, जिनमें से एक सीटीनुमा चीज है, और इसका नाथ संप्रदाय में सबसे अलग महत्व है. जैसे हर योगी के कानों में कुंडल और गले में जनेऊ होता है, वैसे ही नाथ संप्रदाय के हर योगी के पास सिटीनुमा चीज होती है, जिसे नादि कहते हैं. इसी से हर योगी अपने गुरु को प्रणाम करते हैं, और सीएम योगी आदित्यनाथ भी वही कर रहे हैं. आप उनके तरीके से समझ सकते हैं, वो अपने गुरु को प्रणाम करते हैं, जो सीटीनुमा चीज इनके हाथ में हैं, उसके बारे में दैनिक भास्कर अपनी रिपोर्ट में लिखता है...इसमें बना रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रतीक है. जनेऊ में एक मोती भी होता है, जो भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है और मनका विष्णु का प्रतीक है. हर योगी के लिए इसे पहनना जरूरी है.

आप ये जानकर शायद दंग रह जाएं कि गोरखनाथ मंदिर परिसर में जब भी कोई संत एक दूसरे से मुलाकात करते हैं, यहां तक कि सीएम योगी से भी कोई संत मुलाकात के लिए पहुंचते हैं, तो वो नमस्कार की बजाय आदेश बोलते हैं, यहां आदेश का मतलब है...आ से आत्मा, द से देवता और श से संत. यानी आपमें विद्यमान संत को प्रणाम.

यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ सीएम बनने के बाद भी किसी तरीके के मोह की बात नहीं करते, वो एक झटके में कहते हैं मैं नौकरी करने नहीं आया, सम्मान तो मुझे मठ में भी मिल रहा था, मैं बदलाव के लिए आया हूं, और यही बदलाव यूपी के अलग-अलग आयोजनों से लेकर विकास तक में दिख रहा है, आज महाकुंभ में करोड़ों लोग आस्था की डूबकी लगाने के बाद बस यही कह रहे हैं भगवान योगी आदित्यनाथ को लंबी आयु प्रदान करें. और योगी आदित्यनाथ हर पूजा के बाद भगवान से देश-प्रदेश की उन्नति की दुआं कर रहे हैं.

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