नई दिल्ली: कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में स्थित आलंद (अलंद) के लाडले मशाइक दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि के मौके पर एक खास घटनाक्रम सामने आया है. यहां मौजूद राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष को अनुमति प्रदान की है. यह दरगाह 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) से जुड़ी है, जबकि परिसर में 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य का भी ऐतिहासिक संबंध बताया जाता है.
लंबे समय से दोनों समुदायों के लोग यहां अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करते रहे हैं. हाल के वर्षों में इस जगह को लेकर कुछ विवाद उत्पन्न हुए थे, खासकर 2022 में कुछ घटनाओं के बाद. हिंदू संगठनों ने शिवलिंग पर पूजा के अधिकार की मांग की. याचिकाकर्ता सिद्धरामैया हीरेमठ (या सिद्ध रामैया हीरेमठ) ने कोर्ट में अर्जी दायर की, जिसमें भक्तों को पूजा की इजाजत और सुरक्षा की व्यवस्था की मांग की गई. कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करते हुए महाशिवरात्रि (इस साल फरवरी मध्य में) के दिन सीमित संख्या में (लगभग 15) हिंदू भक्तों को दरगाह परिसर के अंदर शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति दी.
पूजा भारी पुलिस सुरक्षा के इंतजाम के साथ संपन्न होगी, और समय भी निर्धारित रखा गया है ताकि शांति बनी रहे. पिछले साल (2025) में भी इसी तरह का फैसला आया था, जिसमें सीमित भक्तों को अनुमति मिली और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. इस बार भी कोर्ट ने उसी आधार पर निर्णय लिया. दूसरी ओर, दरगाह कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें पूजा पर रोक और परिसर के मौजूदा धार्मिक स्वरूप में किसी बदलाव को रोकने की मांग की गई.
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं पहले हाई कोर्ट में ही सुनी जानी चाहिए. इस फैसले से हिंदू समुदाय में उत्साह है, और इसे धार्मिक स्वतंत्रता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है. प्रशासन दोनों समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए सतर्क है, और पूजा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की उम्मीद है.