नई दिल्ली: मालेगांव बम ब्लास्ट केस के आरोपों में पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं. NIA ने कोर्स के प्रज्ञा ठाकुर समेत 7 आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है. 2008 में हुए इस मालेगांव बम ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मुंब स्पेशल कोर्ट से इन सभी आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धारा 16 के तहत देने का अनुरोध किया है. साध्वी पज्ञा पर आरोप है कि उन्होंने हिन्दुत्व की विचारधारा से जुड़ी एक व्यापक साजिश के तहत इस ना सिर्फ इस विस्फोट की साजिश रची बल्कि इसे अंजाम भी दिया था.
दरअसल शनिवार के दिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट में अपनी आखिरी दलील पेश की थी, अब इस मामले में फैसला 8 मई को जज ए. के. लाहोटी सुनाएंगे. इस केस में साध्वी प्रज्ञा के साथ रमेश उपाध्याय, अजय अहिरवार, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी, प्रसाद पुरोहित और स्वामी दयानंद पांडे के ऊपर धमाके की साजिश रचने और उस वारदात को अंजाम देने का आरोप है.
शाहिद नदीम जो कि जमीयत उलेमा महाराष्ट्र की लीगल सेल के वकील हैं, उनका कहना है कि फांसी की सजा की मांग करते हुए एजेंसी ने UAPA कानून की धारा-16 का हवाला दिया था. इस धारा के अनुसार अगर किसी आतंकी हमले में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो आरोपी को फांसी की सजा भी दी जा सकती है.
2008 में हुआ था मालेगांव विस्फोट
महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में एक विस्फोट हुआ था. इस विस्फोट के लिए जिस एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल का इस्तमाल हुआ था, वो बाइक साध्वी प्रज्ञा की ही बताई जाती है. 29 सितंबर 2008 को हुए इस ब्लास्ट में 7 लोगों की मौत हुई थी जबकि 100 से ज्यादा लोग घाए थे. ये विस्फोट भीकू चौक पर हुआ था. जहां नमाज पढ़ कर लौट रहे लोग इसके शिकार बने थे. NIA ने इस मामले की जंच की, जिसमें बीच में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को थोड़ी राहत मिली थी, जब 2021 में साक्ष्यों की कमी के कारण उनका नाम केस से हटा दिया गया था, लेकिन अब फिर से साध्वी प्रज्ञा के लिए मौत की सजां की मांग उठा कर जांच एजेंसी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.