लखनऊ : मायावती की भतीजी दीपिका आनंद इन दिनों बहुजन समाज पार्टी की सियासत में अचानक चर्चा का केंद्र बन गई हैं. इसकी वजह बसपा सुप्रीमो का परिवार और पार्टी की जिम्मेदारियों को लेकर दिया गया ताजा बयान है. मायावती ने संकेत दिया है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटों को भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, जबकि जरूरत पड़ने पर उनकी बेटी दीपिका आनंद को पार्टी के काम में आगे लाया जा सकता है.
दीपिका आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं. आनंद कुमार लंबे समय से मायावती के साथ बसपा के संगठनात्मक कामकाज में जुड़े रहे हैं और पार्टी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. हालांकि, दीपिका अब तक बसपा की सक्रिय राजनीति से दूर रही हैं और उनका नाम पार्टी की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में सार्वजनिक तौर पर ज्यादा सामने नहीं आया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दीपिका फिलहाल लंदन में वकालत की पढ़ाई कर रही हैं. उनका पेशेवर झुकाव कानून के क्षेत्र की तरफ रहा है और अभी तक उन्होंने औपचारिक तौर पर राजनीति में कदम नहीं रखा है. यही वजह है कि मायावती के बयान के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.
मायावती ने परिवारवाद को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा है कि बसपा में सिर्फ परिवार के लोगों को आगे बढ़ाना पार्टी की सोच नहीं है. किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी उसकी क्षमता, मेहनत और पार्टी के मिशन के प्रति निष्ठा के आधार पर मिलनी चाहिए. इसी नीति के तहत आनंद कुमार के दोनों बेटों को आगे जिम्मेदारी नहीं देने की बात कही गई है.
वहीं, जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार अपनी जिम्मेदारी में दीपिका की मदद ले सकते हैं. अगर वह पार्टी के काम में सक्रिय होती हैं और अपनी क्षमता साबित करती हैं, तो भविष्य में उन्हें संगठन में कोई भूमिका मिल सकती है. फिलहाल दीपिका आनंद की बसपा में औपचारिक राजनीतिक एंट्री नहीं हुई है, लेकिन मायावती के बयान ने उन्हें पार्टी के संभावित भविष्य के चेहरों की चर्चा में जरूर ला दिया है.