यासीन मलिक के लिए उमड़ा महबूबा मुफ़्ती का प्रेम, अमित शाह से की रहम की गुहार, टेरर फंडिंग मामले में काट रहा है उम्रकैद की सजा

Global Bharat 19 Sep 2025 07:09: PM 2 Mins
यासीन मलिक के लिए उमड़ा महबूबा मुफ़्ती का प्रेम, अमित शाह से की रहम की गुहार, टेरर फंडिंग मामले में काट रहा है उम्रकैद की सजा

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने टेरर फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चीफ यासीन मलिक के लिए केंद्र सरकार से नरमी बरतने की मांग की है. महबूबा मुफ़्ती ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखते हुए इस मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की है.

महबूबा मुफ्ती ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा “मैंने अमित शाह को पत्र लिखकर यासीन मलिक के मामले को मानवीय नजरिए से देखने की अपील की है. भले ही मैं उनकी राजनीतिक विचारधारा से सहमत नहीं हूं, लेकिन हिंसा छोड़कर राजनीतिक प्रक्रिया से जुड़ने और असहमति को बिना हिंसा जताने के उनके कदम को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता.

यासीन मलिक को 2022 में दिल्ली की एनआईए (NIA) अदालत ने टेरर फंडिंग केस में दोषी पाते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस फैसले को लेकर काफी बहस होती रही है. वहीं, महबूबा मुफ्ती का यह गुजारिश राजनीतिक हलकों में नई चर्चा का विषय बन गया है. इससे पहले यासीन मलिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कई दावे किए थे. उन्होंने कहा था कि साल 2006 में पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहल पर एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी. इस दौरान मलिक की मुलाकात लश्कर-ए-तैयबा (LAT) के संस्थापक और 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद से हुई थी. 

मलिक ने दावा किया था कि इस बैठक का उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ धार्मिक व राजनीतिक स्तर पर संवाद स्थापित करना था. उन्होंने अपने हलफनामे में कहा कि हाफिज सईद ने उस सम्मेलन में जिहादी समूहों से हिंसा छोड़कर शांति का रास्ता अपनाने की अपील की थी. इस्लामी शिक्षाओं का हवाला देते हुए सईद ने कहा था कि यदि कोई शांति की पेशकश करे तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए. 

मलिक का कहना है कि इस पहल के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने व्यक्तिगत रूप से भी उनका आभार जताया. हालांकि, बाद के वर्षों में इस बैठक को उनके पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों से करीबी के सबूत के रूप में पेश हुआ, जिसे यासीन मलिक ने  राजनीतिक विश्वासघात करार देते हुए कहा कि उस समय जो आधिकारिक पहल थी, उसे बाद में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए तोड़-मरोड़ कर इस्तेमाल किया गया.

महबूबा मुफ्ती का यह ताजा बयान ऐसे समय में आया है, जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था व आतंकी गतिविधियां लगातार केंद्र सरकार के एजेंडे में बनी हुई हैं. अब देखना होगा कि उनकी इस अपील पर गृह मंत्रालय क्या रुख अपनाता है. फिलहाल आतंकवाद पर केंद्र सरकार का रुख बेहद साफ है और कश्मीर से आतंकवाद की जड़ों को खत्म करना एकमात्र उद्देश्य है.

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