Jammu and Kashmir Reservation Policy: जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति को लेकर छात्रों और बेरोजगार युवाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. मौजूदा नीति के तहत कुल आरक्षण 60 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जिससे ओपन मेरिट (सामान्य वर्ग) की सीटें घटकर सिर्फ 30-40 प्रतिशत रह गई हैं. आलोचना करने वालों का कहना है कि आबादी का बड़ा हिस्सा सामान्य वर्ग का है, लेकिन उन्हें अवसर बहुत कम मिल रहे हैं.
इस मुद्दे पर छात्रों ने श्रीनगर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बनाई थी, जिसमें कई राजनीतिक नेता भी शामिल होने वाले थे. लेकिन प्रदर्शन से पहले अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाते हुए कई प्रमुख नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया. इनमें पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के श्रीनगर सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी, पीडीपी विधायक वहीद उर रहमान पारा और पूर्व श्रीनगर मेयर जुनैद अजीम मट्टू शामिल हैं.
इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर महिला पुलिस की पूरी टीम तैनात है ताकि उन्हें बाहर निकलने से रोका जा सके. उन्होंने इसे सुरक्षा एजेंसियों की 'पैरानॉयया' करार दिया और पूछा कि किस कानून के तहत यह कार्रवाई की गई है.
इसी तरह, सांसद रूहुल्लाह मेहदी के कार्यालय ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आधिकारिक रूप से नजरबंद करने की सूचना दी है. उन्होंने दावा किया कि देर रात कुछ छात्रों को गिरफ्तार किया गया और उनके परिवारों को धमकाया गया. उनका कहना है कि यह सब इसलिए क्योंकि छात्र नौकरियों और शिक्षा में संतुलित आरक्षण की मांग कर रहे हैं.
वहीद पारा ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि आरक्षण मुद्दे को हल करने की कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखाई जा रही. इस कार्रवाई के बाद छात्रों ने अपना प्रस्तावित धरना रद्द कर दिया. कश्मीर में यह मुद्दा राजनीतिक तनाव बढ़ा रहा है, जहां सत्ता और विपक्ष दोनों के नेता छात्रों के समर्थन में उतर आए थे.