नई दिल्ली: केंद्र सरकार देशभर में न्यूनतम मजदूरी में बड़ा इजाफा करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, दैनिक न्यूनतम वेतन को 350 रुपए से 450 रुपए के बीच लाने पर विचार चल रहा है. इस कदम से राज्यों में भी मजदूरी संशोधन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है. हाल ही में नोएडा में हुए के प्रदर्शनों के बाद यूपी और हरियाणा जैसे राज्यों को मजदूरी बढ़ाने का फैसला करना पड़ा. श्रम मंत्रालय कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल कामगारों के लिए नई वेतन संरचना तैयार कर रहा है.
जब केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी की अधिसूचना जारी करेगा, तो सभी राज्यों को उससे कम वेतन तय नहीं कर सकेंगे. मासिक वेतन की गणना दैनिक मजदूरी को 26 दिनों से गुणा करके की जाएगी. वर्तमान में राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 176 रुपए प्रतिदिन है, जो साल 2017 में तय की गई थी. आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में यह बात सामने आई है कि कंपनियों का EBITDA मार्जिन पिछले चार साल से लगभग 22% के स्थिर स्तर पर बना हुआ है, लेकिन कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत धीमी रही है. खासकर आईटी सेक्टर के नए कर्मचारियों के वेतन में लगभग ठहराव जैसी स्थिति है.
चार नई श्रम संहिताएं क्या है
राज्यों में हालिया बदलाव
हरियाणा सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन लगभग 15,200 रुपए हो गया है. उत्तर प्रदेश ने भी नोएडा और गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन 11,313 रुपए से बढ़ाकर 13,690 रुपए कर दिया है. अर्ध-कुशल मजदूरों को अब 15,059 रुपए और कुशल मजदूरों को 16,868 रुपए मिलेंगे.
महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य पहले से ही अपेक्षाकृत बेहतर मजदूरी दे रहे हैं. इनमें अकुशल मजदूरों को 15,000 से 16,000 रुपए तक मासिक वेतन मिल रहा है. इन राज्यों ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे अपनी मजदूरी की समीक्षा कर सकते हैं. बिहार और पंजाब भी मजदूरी बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.
पंजाब सरकार ने अपने प्रस्ताव को वित्त विभाग को भेज दिया है. भाजपा नेता और बिहार के पूर्व मंत्री राम सूरत राय का कहना है कि सरकार को जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए नियमित अंतराल पर मजदूरी में संशोधन करना चाहिए. इससे अचानक बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी और दोनों पक्षों के लिए समायोजन आसान रहेगा.
कांग्रेस नेता रणजीत रंजन ने कहा कि मजदूरों की मजदूरी महंगाई के हिसाब से बढ़नी चाहिए ताकि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर सकें. उन्होंने कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी हर साल समय पर मजदूरी की समीक्षा करनी चाहिए. कुल मिलाकर, न्यूनतम मजदूरी में प्रस्तावित बढ़ोतरी से देशभर के मजदूरों की आय में सुधार की उम्मीद है, हालांकि इससे उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ सकता है.