नई दिल्ली: इन दिनों घुसपैठ दुनियाभर के लिए एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है. अमेरिका-ब्रिटेन सहित कई देश इसे लेकर सख्त कदम उठा रहे हैं. अब इस दिशा में भारत सरकार भी बड़ा कदम उठाने वाली है. मोदी सरकार भारत में अवैध तरीके से घुसने वालों को रोकने के लिए नया विधेयक लाने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में वैध पासपोर्ट या वीजा के बिना प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को प्रस्तावित आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 के तहत पांच साल तक की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.
यह विधेयक लोकसभा में पेश किया जाने वाला है, जिसका उद्देश्य विदेशियों और आव्रजन से संबंधित मौजूदा कानूनों को चार अधिनियमों- विदेशी अधिनियम, 1946; पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920; विदेशियों के पंजीकरण अधिनियम, 1939; और आव्रजन (वाहक देयता) अधिनियम, 2000 को बदलकर एक ही कानून में समाहित करना है. दावा किया जा रहा है कि इस विधेयक के पास होने के बाद घुसपैठ पर रोक लगेगी.
नए प्रावधान में क्या-क्या है?
1. जाली यात्रा दस्तावेजों का उपयोग करने वालों के लिए न्यूनतम जेल की अवधि दो साल होगी, जो सात साल तक बढ़ सकती है, साथ ही 1 लाख से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. वर्तमान में, भारत में जाली पासपोर्ट के साथ प्रवेश करने की अधिकतम सजा आठ साल की जेल और 50,000 रुपए तक का जुर्माना है.
2. इस विधेयक में उच्च शैक्षिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों को विदेशी छात्रों के विवरण साझा करने के लिए नामित पंजीकरण अधिकारी को जिम्मेदार बनाने के प्रावधान भी शामिल हैं. यह नियम अस्पतालों, नर्सिंग होम और विदेशियों को ठहरने की सुविधा प्रदान करने वाले चिकित्सा संस्थानों पर भी लागू होता है.
3. वीजा की अवधि से अधिक समय तक रहने वाले विदेशी नागरिक, वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने वाले या प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले तीन साल तक की जेल, 3 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों का सामना कर सकते हैं.
4. इसके अलावा, अवैध दस्तावेजों के साथ विदेशियों को परिवहन करने वाले वाहकों को आव्रजन अधिकारियों द्वारा 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. जुर्माना न देने पर परिवहन वाहन को जब्त या हिरासत में लिया जा सकता है, जिसमें विमान, जहाज या अन्य परिवहन साधन शामिल हो सकते हैं.
5. विधेयक में केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों के प्रवेश, निकासी और भारत के भीतर उनकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने या नियमित करने का अधिकार देने का प्रावधान भी शामिल है. इन प्रावधानों में विदेशियों को अपने खर्च पर निकासी करने, बायोमेट्रिक पंजीकरण कराने या विशिष्ट क्षेत्रों में प्रवेश करने से बचने की आवश्यकता शामिल है.