नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून ने रविवार को पूरे भारत को कवर कर लिया, जो सामान्य तारीख से नौ दिन पहले है. इस बार मानसून ने दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाकी हिस्सों में भी प्रवेश कर लिया. पिछले 25 सालों में ऐसा केवल चौथी बार हुआ है कि मानसून ने दिल्ली-एनसीआर और उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों को एक ही दिन में कवर किया.
इसी के साथ दिल्ली और झारखंड के लिए दो दिन का अलर्ट जारी किया गया है. उधर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की खबर मिल रही है, जिससे जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. कई इलाकों में सड़क बाधित हो गए हैं. वहीं, कुछ इलाकों से बादल फटने की भी खबर आ रही है.
आखिरी बार ऐसा 2021 में 13 जुलाई को हुआ था, जबकि सबसे जल्दी 2013 में 16 जून को, जब केदारनाथ में बादल फटने और बाढ़ के कारण बड़ा हादसा हुआ था. इस बार मानसून ने 24 मई को केरल में प्रवेश किया, जो सामान्य तारीख से आठ दिन पहले था. पूरे देश को कवर करने में इसे 37 दिन लगे, जबकि औसतन 38 दिन (1 जून से 8 जुलाई) लगते हैं. 2013 में मानसून ने केवल 16 दिन में पूरे देश को कवर किया था.
IMD के आंकड़ों के अनुसार, 29 जून तक देश में कुल मिलाकर 8% अधिक मानसूनी बारिश हुई है. उत्तर-पश्चिम भारत में 37% और मध्य भारत में 24% अतिरिक्त बारिश हुई, जिससे जून में खेती की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ गई.
हालांकि, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 16.7% और दक्षिणी प्रायद्वीप में 1.7% कम बारिश हुई, लेकिन इससे खरीफ फसलों (जैसे धान, गन्ना, मोटे अनाज और कपास) की बुआई पर कोई असर नहीं पड़ा. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 20 जून तक खरीफ फसलों की बुआई 138 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल की समान अवधि में 125 लाख हेक्टेयर थी—यानी 10% से अधिक की वृद्धि. IMD ने अगले सात दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में "भारी से बहुत भारी बारिश" की भविष्यवाणी की है.
मानसून का जल्दी या देर से आने या कवर होने का बारिश की मात्रा या पूरे सीजन (1 जून से 30 सितंबर) में इसके वितरण पर कोई असर नहीं पड़ता. हालांकि, यह खरीफ फसलों की बुआई को प्रभावित करता है, क्योंकि किसान सिंचाई की जरूरतों के आधार पर फसल चुनते हैं.