जींद: हरियाणा के जींद जिले के संगतपुरा गांव की 48 वर्षीय सुदेश देवी मंगलवार सुबह BPL कार्ड लेकर राशन की दुकान जा रही थीं. तभी उनके पुराने कीपैड फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आई. दूसरी तरफ से आवाज आई – “नीरू ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीत लिया है!”
घर में टीवी या स्मार्टफोन न होने के कारण सुदेश देवी बेटी का मुकाबला देख नहीं पाई थीं. इसलिए इस खबर पर उन्हें पहले यकीन ही नहीं हुआ. राशन लेने के बाद जल्दी घर लौटकर जब उन्होंने पुष्टि की, तो खुशी से भावुक हो गईं. एक छोटे से गांव की बेटी ने इतिहास रच दिया था.
नागोया में रचा इतिहास
जापान के नागोया में खराब मौसम के बीच 26 वर्षीय नीरू ढांडा ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता. वे इस इवेंट में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. फाइनल में उन्होंने 30 में से 28 निशाने साधे. चीन की सुन युनोंग ने 26 और कुवैत की अब्दुलमलिक हाजर ने 21 निशाने लगाए.
नीरू की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले वे गंभीर फ्लू की चपेट में आ गई थीं. भोपाल के अस्पताल में भर्ती रहीं और कई दिनों तक ठीक से खाना भी नहीं खा सकीं. कोच मंशेर सिंह की सलाह पर उन्होंने बीमारी को दरकिनार कर सिर्फ निशाने पर ध्यान दिया और गोल्ड अपने नाम कर लिया.
गोल्ड किसे समर्पित किया?
नीरू ने अपनी उपलब्धि देश की सीमाओं पर तैनात जवानों को समर्पित की. उन्होंने 1978 में एशियन गेम्स में व्यक्तिगत ट्रैप गोल्ड जीतने वाले रणधीर सिंह को भी याद किया. उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी का सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना होता है और एशियन गेम्स के ये पदक उसी दिशा में कदम हैं. गरीब परिवार से आने वाली नीरू की यह सफलता संघर्ष, मेहनत और मां के अटूट विश्वास की मिसाल है. अब पूरा गांव उनकी कामयाबी पर गर्व कर रहा है.