नई दिल्ली : नेपाल में हालिया फ्लैश फ्लड से तबाह हुए एक स्कूल को भारत दोबारा बनाने में मदद करेगा। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नुवाकोट के बिदुर स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि बाढ़ के दौरान प्रिंसिपल के समय पर लिए गए फैसले ने 1600 से ज्यादा स्कूली बच्चों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई.
भारतीय राजदूत के मुताबिक, रासुवा इलाके में आई फ्लैश फ्लड से स्कूल के बह जाने से ठीक पहले बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया था. इस दौरान प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी की तत्परता और सूझबूझ ने बड़ी जनहानि को टालने में मदद की.
उन्होंने बताया कि त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल का इतिहास भी भारत-नेपाल सहयोग से जुड़ा है. यह स्कूल मूल रूप से 1950 के दशक में बनाया गया था. इसके डिजाइन में एक भारतीय इंजीनियर की भूमिका थी, जो त्रिशूली हाइड्रोपावर प्लांट के निर्माण से जुड़े थे. इस हाइड्रोपावर परियोजना के निर्माण में भारत ने भी सहयोग किया था.
भारतीय राजदूत ने यह भी बताया कि स्कूल की नई बिल्डिंग वर्ष 2022 में भारत की ग्रांट से बनाई गई थी. यह निर्माण भारत सरकार के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (HICDP) कार्यक्रम के तहत हुआ था.
अब प्राकृतिक आपदा में स्कूल के तबाह होने के बाद भारत ने एक बार फिर मदद का भरोसा दिया है. राजदूत ने प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को बताया कि भारत भविष्य में इस स्कूल के पुनर्निर्माण में सहायता करेगा.
इस घोषणा को भारत-नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे विकास सहयोग की एक और मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है. आपदा के बीच बच्चों की जान बचाने वाले प्रिंसिपल की भूमिका की भी सराहना हो रही है.