लखनऊ : देवरिया के सोनूघाट गांव में 65 वर्षीय मोहन प्रसाद की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार का मामला चर्चा में है. परिजनों के मुताबिक, मोहन प्रसाद ने अपनी अंतिम इच्छा जताई थी कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार दाह संस्कार के बजाय दफनाकर किया जाए. परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें कब्रिस्तान में दफनाया. अंतिम संस्कार का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
जानकारी के अनुसार, मोहन प्रसाद काफी समय से बीमार चल रहे थे. उनका इलाज गोरखपुर स्थित फातिमा अस्पताल में चल रहा था. रविवार को डॉक्टरों की सलाह के बाद परिजन उन्हें एंबुलेंस से घर लेकर लौट रहे थे. बताया जा रहा है कि घर पहुंचने के बाद जब मोहन प्रसाद एंबुलेंस से उतर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उनकी मौत हो गई. अचानक हुई मौत से परिवार में मातम पसर गया.
परिजनों ने बताया कि मोहन प्रसाद अपनी अंतिम इच्छा को लेकर परिवार के लोगों से कई बार बात कर चुके थे. वह कहते थे कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें जलाने के बजाय दफनाया जाए. परिवार के मुताबिक, उन्होंने उनकी इच्छा को गंभीरता से लिया और निधन के बाद उसी के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारी की.
बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार को लेकर कुछ लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए आपत्ति भी जताई. हालांकि, परिवार ने मोहन प्रसाद की बताई गई अंतिम इच्छा को प्राथमिकता दी। इसके बाद उन्हें कब्रिस्तान में दफनाया गया.
अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों में यह मामला चर्चा का विषय बना रहा. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. हालांकि, परिवार का कहना है कि उन्होंने केवल दिवंगत मोहन प्रसाद की इच्छा का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया.