नई दिल्ली : दिल्ली में छात्र आंदोलनों से जुड़ी FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. 20 जुलाई को जंतर-मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था. दिल्ली में संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं, इसके बाद कई छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं.
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त की सुनवाई में संकेत दिया था कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत छात्रों से जुड़ी एफआईआर को खत्म करने पर विचार कर सकता है. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि गंभीर और जघन्य अपराधों के आरोपियों को इस राहत से बाहर रखा जाएगा. अदालत ने केंद्र से छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की पूरी सूची भी मांगी थी.
तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि क्रिमिनल एंटीसीडेंट्स का मतलब सामान्य मामलों से नहीं, बल्कि गंभीर और जघन्य अपराधों से है. ऐसे मामलों को छोड़कर राज्यों को कानून के मुताबिक छात्रों के खिलाफ एफआईआर बंद या वापस लेने की अनुमति दी जा सकती है.
इस मामले में 31 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए 13 FIR वापस लेने की मांग की, इनमें 10 FIR हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराओं वाली बताई गई हैं. पुलिस ने हिंसा के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे 2,873 लोगों के खिलाफ एक अलग समेकित FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है.
अब एक सितंबर की सुनवाई पर नजर है. केंद्र ने भी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को अनुच्छेद 142 के तहत खत्म करने की मांग की है. ऐसे में अदालत का फैसला छात्रों के लिए बड़ी कानूनी राहत का रास्ता खोल सकता है, लेकिन गंभीर अपराधों के मामलों में कार्रवाई जारी रहने की संभावना है.