नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े विवाद में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) के तथाकथित फैसले को सोमवार को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने इस अदालत को ‘अवैध’ बताते हुए साफ कहा कि इस मामले में उसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और उसके किसी भी फैसले या आदेश का भारत की कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि मध्यस्थता न्यायालय द्वारा जारी किसी भी निर्णय का भारत पर कोई प्रभाव नहीं होगा. साथ ही यह भी दोहराया गया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला यथावत लागू है. भारत का यह रुख नया नहीं है. नई दिल्ली पहले भी जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजनाओं और सिंधु जल संधि से जुड़े मामलों में इस अदालत के फैसलों को खारिज कर चुकी है.
भारत का स्पष्ट पक्ष है कि इस तथाकथित न्यायालय का गठन ही संधि के प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए इसके सभी फैसले अमान्य और शून्य हैं. इससे पहले पाकिस्तान ने चेतावनी दी थी कि सिंधु जल संधि के तहत उसके हिस्से के पानी से वंचित करने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय सुरक्षा पर ‘गंभीर परिणाम’ होंगे.
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा था कि संधि में एकतरफा निलंबन का कोई प्रावधान नहीं है. सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी. पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने अप्रैल 2025 में इसे ‘स्थगित’ कर दिया था. भारत का रुख साफ है कि वह इस अवैध अदालत को मान्यता नहीं देता.