नई दिल्ली : पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है. पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर जमींदोज कर दिया गया. बताया जा रहा है कि यह मंदिर एक सदी से भी ज्यादा पुराना था और लंबे समय से इलाके में हिंदू समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहा है.
मंदिर को गिराए जाने की घटना के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. अधिकारियों और अल्पसंख्यक संगठनों के अनुसार, मंदिर की जमीन का इस्तेमाल कथित तौर पर मदरसे के लिए किए जाने की योजना है. इसी वजह से मंदिर को गिराए जाने की बात सामने आई है.
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई है. अल्पसंख्यक संगठनों का कहना है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का संरक्षण किया जाना चाहिए, न कि उन्हें ध्वस्त करके उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे उद्देश्य के लिए किया जाए.
नरोवाल जिले में सामने आया यह मामला पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों की स्थिति पर एक बार फिर बहस छेड़ सकता है. पाकिस्तान में विभाजन के समय बड़ी संख्या में हिंदू मंदिर मौजूद थे, लेकिन समय के साथ कई मंदिर या तो बंद हो गए, अतिक्रमण की चपेट में आए या उनका इस्तेमाल दूसरे कार्यों के लिए किए जाने के आरोप लगते रहे हैं.
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 100 साल से अधिक पुराने मंदिर की जमीन का मालिकाना हक और उसके इस्तेमाल का फैसला किस आधार पर किया गया. अधिकारियों और अल्पसंख्यक संगठनों के आरोपों के बीच अब इस कार्रवाई की पारदर्शी जांच और मंदिर की जमीन के रिकॉर्ड को सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ सकती है.