'मदद नहीं, मुआवजा चाहिए...' नेपाल ने भारत, अमेरिका और चीन से मांगा जलवायु हर्जाना

Amanat Ansari 01 Sep 2026 07:16 PM 1 Mins
'मदद नहीं, मुआवजा चाहिए...' नेपाल ने भारत, अमेरिका और चीन से मांगा जलवायु हर्जाना

काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर ढहने से आई विनाशकारी बाढ़ में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब 4,000 लोगों के लापता होने के बीच नेपाल ने अपनी अंतरराष्ट्रीय रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. नेपाल सरकार ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय शीर्ष उत्सर्जक देशों से ‘जलवायु मुआवजे’ की मांग करने का कड़ा कूटनीतिक रुख अपनाया है.

विदेश मंत्री का साफ रुख

‘द काठमांडू पोस्ट’ को दिए इंटरव्यू में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नगण्य योगदान देने के बावजूद दूसरों की ओर से पैदा किए गए जलवायु संकट की सबसे भारी कीमत चुका रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया, “चीन दुनिया का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, उसके बाद अमेरिका दूसरे और भारत तीसरे नंबर पर है. इन प्रमुख औद्योगिक देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे संवेदनशील देशों को मुआवजा दें.”

खनाल ने जोर देकर कहा कि नेपाल ‘दान या भीख’ नहीं मांग रहा, बल्कि यह कानूनी और नैतिक जवाबदेही का मामला है. नेपाल के वित्त मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को ‘जलवायु मुआवजा दावा पत्र’ जारी कर दिया है.

‘यह आम बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने आपदा की भयावहता बताते हुए कहा कि 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई लहरें 20 से 30 मीटर ऊंची थीं और पानी का बहाव 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से था. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हिमालयी ग्लेशियर पिघलते रहे, तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के 2 अरब से अधिक लोगों का जल सुरक्षा तंत्र हमेशा के लिए नष्ट हो सकता है.

5 अरब डॉलर की मांग

नेपाल ने इस त्रासदी से उबरने और पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर के नुकसान का आकलन किया है और संयुक्त राष्ट्र के ‘क्लाइमेट-डिजास्टर रिकवरी फंड’ से तुरंत वित्तीय सहायता मांगी है. जलवायु परिवर्तन प्रमुख महेश्वर ढकाल ने कहा कि कमजोर देशों को जलवायु परिवर्तन का अनुपात से कहीं ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जबकि वैश्विक उत्सर्जन में उनका योगदान बेहद कम है. इस आपदा में अब तक नेपाल में 987 और तिब्बत (चीन) में 16 मौतों को मिलाकर कुल 1,003 लोगों की जान जा चुकी है. करीब 4,000 लोग अभी भी लापता हैं.

Climate compensation India US China Climate change

Recent News