Up Election 2027 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और सपा के बीच नहीं रहने वाला. असदुद्दीन ओवैसी, चंद्रशेखर आजाद और मुकेश सहनी जैसे नेता अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं, जबकि चिराग पासवान की मौजूदगी NDA के सामाजिक विस्तार का हिस्सा बन सकती है. ओवैसी ने यूपी में AIMIM की चुनावी तैयारी शुरू कर दी है और गठबंधन की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।.
ओवैसी का निशाना मुस्लिम वोट पर है. AIMIM की एंट्री का सबसे बड़ा असर उन सीटों पर हो सकता है जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक संख्या में हैं. अगर मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा AIMIM की तरफ जाता है तो सीधा नुकसान सपा-कांग्रेस के उम्मीदवारों को हो सकता है. कम अंतर वाली सीटों पर 5-10 फीसदी वोट का बदलाव भी नतीजा पलट सकता है.
चंद्रशेखर आजाद का दांव दलित-पिछड़ा वोट पर है. BSP के कमजोर होने से यूपी में दलित राजनीति की जमीन खाली हुई है. चंद्रशेखर इसी स्पेस को भरने की कोशिश कर रहे हैं. उनका असर खासकर पश्चिमी यूपी और दलित बहुल सीटों पर सपा और बसपा दोनों के लिए चुनौती बन सकता है.
मुकेश सहनी का निषाद कार्ड सामने आएगा. सहनी यूपी में निषाद समाज को आरक्षण के मुद्दे पर लामबंद कर रहे हैं. उनका सबसे सीधा मुकाबला बीजेपी के मौजूदा निषाद समीकरण और निषाद पार्टी से माना जा सकता है.
चिराग पासवान का समीकरण अलग है. अगर उनकी पार्टी NDA के साथ मजबूती से मैदान में उतरती है तो पासवान दलित वोटों के जरिए बीजेपी के सामाजिक गठजोड़ को मजबूती मिल सकती है.
कुल मिलाकर ओवैसी सपा का, चंद्रशेखर सपा-BSP का, मुकेश सहनी बीजेपी के निषाद समीकरण का और चिराग विपक्ष के दलित वोट बैंक का खेल बिगाड़ सकते हैं, लेकिन असली असर सीटों पर उम्मीदवार और गठबंधन तय होने के बाद ही साफ होगा.