नई दिल्ली: वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने आरोप लगाया है कि महिला न्यायाधीशों के साथ पुरुष सहकर्मियों द्वारा यौन उत्पीड़न भारतीय न्यायपालिका का गंदा रहस्य है. उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में गहराई से जमी हुई पदानुक्रमिक और सामंती संस्कृति के कारण ऐसे मामले चुपचाप दब जाते हैं और कोई इनके बारे में बात नहीं करना चाहता.
जयसिंह 29वें डी.एस. बोरकर स्मृति व्याख्यान, 'माय विजन ऑफ इंडिया: 2047 ए.डी.' में बोल रही थीं. उन्होंने बताया कि अपने अनुभव में उन्होंने कई महिला न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व किया है, जो पुरुष न्यायाधीशों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर उनके पास आई थीं. उन्होंने अपनी पुस्तक में भी लिखा है कि यौन उत्पीड़न भारतीय न्यायपालिका का गंदा रहस्य है.
उन्होंने एक महिला न्यायाधीश के मामले का जिक्र करते हुए बताया कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के रिटायरमेंट पर जिला अदालत की महिला न्यायाधीशों को एक ही रंग की साड़ी पहनकर पंक्तिबद्ध होना पड़ता है और उन्हें फूल फेंकने पड़ते हैं. जयसिंह के अनुसार, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ऐसी प्रथाओं की अपेक्षा करते हैं, जिनके महिला न्यायाधीशों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ते हैं.
एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक पुरुष न्यायाधीश ने महिला न्यायाधीश से अपनी 25वीं शादी की सालगिरह पर आने और ''आइटम नंबर'' पर नृत्य करने को कहा. जब उन्होंने इनकार किया तो उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी.
इससे पहले उसी कार्यक्रम में पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट चीफ जस्टिस एस. मुरलीधर ने भी न्यायपालिका में वरिष्ठ पुरुष सहकर्मियों द्वारा महिला न्यायाधीशों के साथ यौन संकेत और उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई. जयसिंह ने उम्मीद जताई कि 2047 तक ऐसी प्रथाएं और अनुभव समाप्त हो जाएंगे. उन्होंने न्यायपालिका में शक्ति असंतुलन, जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों पर भी बात की.