अगर गडकरी की यह मांग मान ली जाती है तो लाइफ इंश्योरेंस हो जाएगा सस्ता

Global Bharat 31 Jul 2024 09:44: PM 4 Mins
अगर गडकरी की यह मांग मान ली जाती है तो लाइफ इंश्योरेंस हो जाएगा सस्ता

क्या आप जानते हैं कि आने वाले समय में इलाज कराना सस्ता हो सकता है. अगर वित्त मंत्री ने नितिन गडकरी के सुझाव को मान लिया तो इन्सुरेंस लेने वालों की जेब पर पड़ा बोझ कुछ हल्का हो सकता है. आखिर कैसे यही हम इस वीडियो में विस्तार से समझेंगे. उसके लिए पहले ये जानना भी जरुरी है कि आखिर ये बात उठी कहां से? क्यों अचानक से नितिन गडकरी की इतनी तारीफ होने लगी है.

तो आपको बता दें कि इस सब की शुरुआत हुई एक चिट्ठी से जो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को लिखी. चिट्ठी देखते ही देखते वायरल हो गई. इस चिठ्ठी में उन्होंने इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी को वापस लेने की मांग की है. जैसे ही ये चिट्ठी सामने आई तमाम सवाल भी खड़े होने लगे कि क्या वित्तमंत्री मान लेंगी गडकरी का सुझाव? और अगर ऐसा हुआ तो आम आदमी की जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा? भड़ती महंगाई में ये फैसला आम आदमी को कितनी राहत दे सकता है? सवाल ये भी है कि आखिर कैसे बढ़ जाता है प्रीमियम का खर्च? आम आदमी के ज़ेहन में उठने वाले इन तमाम सवालों के जवाब हम आपको इस वीडियो में देंगे तो वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए.

पहले ही देश की जनता महंगाई की मार झेल रही है. ऐसे में मिडिल क्लास फेमिली के लिए पैसे बचाना मुश्किल हो रहा है. इसलिए लोग इंस्युरेन्स लेते हैं जिससे आड़े वक्त हारी बीमारी होने पर पैसे के अभाव के चलते इलाज़ मिलने में कोई रुकावट न हो. लेकिन जब इन्सुरेंस पर भी 18 प्रतिशत टैक्स लग रहा है तो आम आदमी कहां जाएगा? इसी बारे में सोचते हुए परिवहन मंत्री ने वित्त मंत्री को एक चिट्ठी लिखी और लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस पर लागू जीएसटी हटाने की मांग कर डाली

अपने बेवाक अंदाज के लिए मशहूर नितिन गडकरी ने इस टैक्स को 'जिंदगी की अनिश्चितताओं पर टैक्स लगाने जैसा' करार दिया है. नितिन गडकरी ने फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को लेटर लिखा था. इसमें उन्होंने कहा था, मैं आप से अनुरोध करता हूं कि आप  लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी हटाने के सुझाव पर एक बार विचार करें. यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए बोझिल हो जाता है.' बता दें कि जीवन और चिकित्सा बीमा प्रीमियम, दोनों पर 18 प्रतिशत GST लगता है. अब आपको समझाते हैं कि आखिर इंश्योरेंस पर जीएसटी आपके प्रीमियम की राशि में कैसे इजाफा करता है और कैसे आपको ज्यादा खर्च करना पड़ता है.

कैसे बढ़ जाता है प्रीमियम का खर्च?

टर्म और मेडिकल इंश्योरेंस की बात करें, तो इसके लिए GST कुल प्रीमियम राशि पर लागू किया जाता है. इसे उदाहरण के तौर पर ऐसे समझिए कि अगर आपने अपने लिए या अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए कोई मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी हैं और इसका कवरेज 5 लाख रुपये है, तो प्रीमियम लागत करीब 11,000 रुपये साल आती है. अब इसपर ऊपर से 18 फीसदी की दर से जीएसटी भी लग जाता है 11 हज़ार का 18 परसेंट होता है 1980 रुपये.

यानी 11 हज़ार के अलावा 1980 भी देना होता है. इस हिसाब से आपका प्रीमियम हो जाता है 12,980 रुपये. इस तरीके से जीएसटी लागू होने के बाद स्वास्थ्य बीमा खरीदने वाले पॉलिसी खरीदारों को ज्यादा प्रीमियम राशि का पेमेंट करना पड़ता है. अब अगर नितिन गडकरी की मांग के बाद ये टैक्स पूरी तरह हट जाता है तब तो बड़ा फायदा हो जाएगा, और अगर इसमें कुछ कटौती होती है तब भी आम आदमी को कुछ राहत तो मिलेगी.

फाइनेंशियल सर्विस के तौर पर लगाया जाता है GST

1 जुलाई 2017 में पूरे देश में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर ने भारत के टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया और तब से पूरे देश में अलग-अलग कर की जगह एक ही कर लगाया जाता है. GST के एक अप्रत्यक्ष कर होता है, जो कि घरेलू उत्पाद, कपड़े, उपभोक्ता वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन, रियल एस्टेट के साथ ही सेवाओं पर लगाया जाता है. बीमा को भी एक फाइनेंशियल सर्विस मानते हुए इस कैटेगरी में शामिल किया जाता है. टर्म इंश्योरेंस और मेडिकल इंश्योरेंस दोनों पर एक समान 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगता है.

जीएसटी से पहले 15% टैक्स

जबकि इंश्योरेंस पर जीएसटी लागू होने से पहले 15% टैक्स लगता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद 1 जुलाई 2017 से 18% वसूला जा रहा है. टैक्स दर में 3% की इस बढ़ोतरी से इंश्योरेंस पॉलिसियों के प्रीमियम पर सीधा असर पड़ा है, जिससे प्रीमियम की कीमतें बढ़ गईं. इसलिए इसे हटाए जाने की मांग लंबे समय से चल रही है. नागपुर रीजन के LIC कर्मचारी संघ की तरफ से ये मांग की गई है की कोई व्यक्ति परिवार को सुरक्षा देने के लिए बीमा पॉलिसी खरीदता है उसके प्रीमियम पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए. जिसके बाद मामला नितिन गडकरी के संज्ञान में आया और बढ़ती महंगाई से पहले ही त्रस्त जनता के बारे में सोचते हुए उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखकर जीएसटी हटाने की मांग की. अगर इस मांग को मान लिया जाता है तो फिर लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस सस्ते हो सकते हैं.

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