नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत और संकट अब चरम पर पहुंच गया है. पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देते ही उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिससे उनके भाजपा में शामिल होने की जोरदार अटकलें लगने लगी हैं.
सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ (या सीपी राधाकृष्णन) को इस्तीफा सौंपा और तत्काल प्रभाव से इसे स्वीकार करने की अपील की. महज एक सप्ताह के अंदर यह TMC के लिए दूसरा बड़ा झटका है. इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था.
सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर
असम की सिलचर से कांग्रेस की पूर्व लोकसभा सांसद रह चुकी सुष्मिता देव 2019 में चुनाव हारने के बाद 2021 में ममता बनर्जी की TMC में शामिल हुई थीं. पार्टी में उन्होंने तेज तरक्की की और राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाई गईं. इसके बाद उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया. वे असम में TMC की प्रमुख चेहरा मानी जाती थीं.
TMC में बढ़ता विद्रोह
सुष्मिता देव का यह कदम TMC के अंदरूनी कलह को और उजागर करता है. हाल ही में पार्टी के कई सांसदों और नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं. बागी गुट ने दावा किया है कि उनके साथ 20 से ज्यादा सांसद हैं. TMC नेताओं कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागियों को ''गद्दार'' बताया है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सुष्मिता देव औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होंगी या नहीं, लेकिन हिमंत से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है.