Iran fired a Sejjil missile: पश्चिम एशिया में तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है, जहां इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान का संघर्ष 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है. यह युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जब अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर सहित कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया.
इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र भर में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है. ईरान ने अब तक अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल सेजिल का पहली बार इस्तेमाल किया है.
यह मिसाइल लगभग 2000 किलोमीटर तक मार कर सकती है. ईरानी मीडिया के अनुसार, इस युद्ध में सेजिल का उपयोग इजरायल के सुरक्षा ठिकानों और अन्य लक्ष्यों पर किया गया है, जो ईरान की बढ़ती आक्रामकता का संकेत देता है. इसी बीच दावा किया जा रहा है कि ईरान ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस' की नई लहर में 'सेज्जिल' मिसाइल दागी है.
साथ ही, ईरान ने ड्रोन हमलों को भी बढ़ाया है, जिससे इजरायल, अमेरिकी ठिकाने और खाड़ी देश प्रभावित हो रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट गहरा गया है. यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है.
ईरान की ओर से यहां जहाजों पर हमले और ब्लॉकेज की कोशिशों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है. अमेरिका ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर सैन्य हमले किए हैं, जहां रोजाना लाखों बैरल तेल निकलता है. अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उन्होंने वहां सैन्य लक्ष्यों को नष्ट किया, लेकिन तेल सुविधाओं को बरकरार रखा. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज में रुकावट जारी रही तो और सख्त कार्रवाई हो सकती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बयान दिए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों की सुरक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग से होर्मुज को सुरक्षित किया जाएगा. ट्रंप ने चीन, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस जैसे देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा देश स्पष्ट रूप से सहमत नहीं हुआ है.
ट्रंप का दावा है कि ईरान की नौसैनिक ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है, और वे क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत जैसे यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड और अब्राहम लिंकन को तैनात रखे हुए हैं. हाल ही में यूएसएस त्रिपोली जैसे जहाज और मरीन कमांडो भी भेजे जा रहे हैं. युद्ध के आर्थिक प्रभाव अब साफ दिख रहे हैं.
अगर होर्मुज बंद रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है. भारत जैसे देश, जो तेल का बड़ा आयातक है, के लिए यह बड़ी चुनौती है. भारत ने अपनी कूटनीति से कुछ जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दिलाई है. पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की और बातचीत से समाधान की अपील की है.
क्षेत्र में हमले अब ओमान, बहरीन जैसे स्थानों तक पहुंच गए हैं, जहां बंदरगाहों और जहाजों पर ड्रोन हमले रिपोर्ट हुए हैं. कुछ जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा है. कुल मिलाकर, यह संघर्ष अब सिर्फ इजरायल-ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है. अगले कुछ दिन निर्णायक हो सकते हैं.