हरिद्वार: उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है. चारधाम यात्रा और सावन के पवित्र माह में लाखों श्रद्धालु इस पवित्र भूमि पर आते हैं, अपनी आस्था को मजबूत करने और शांति की तलाश में. लेकिन, इस पवित्रता को दागदार करने वाले कुछ छद्म साधुओं और ठगों ने सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की है. इसे रोकने के लिए उत्तराखंड सरकार ने 'ऑपरेशन कालनेमि' शुरू किया है, जो न केवल एक सुरक्षा अभियान है, बल्कि सनातन धर्म की शुद्धता और देवभूमि की पवित्रता को बनाए रखने का एक संकल्प है.
ऑपरेशन कालनेमि केवल सुरक्षा अभियान नहीं, बल्कि आस्था, सनातन संस्कृति और देवभूमि की दिव्यता की रक्षा का संकल्प है। राज्य सरकार देवभूमि की पवित्रता और सांस्कृतिक अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।#OperationKaalnemi pic.twitter.com/dqNnsktyMv
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 13, 2025
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में सोशल मीडिया मंच X पर इस अभियान की जानकारी साझा करते हुए बताया कि 'ऑपरेशन कालनेमि' के तहत अब तक 100 से अधिक पाखंडी और छद्म वेशधारी कानून की गिरफ्त में आ चुके हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर किसी भी तरह का ढोंग, छल या धार्मिक आवरण में छिपा अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह अभियान विशेष रूप से सावन मास और चारधाम यात्रा के दौरान और सतर्कता के साथ चलाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की रक्षा की जा सके. वहीं खबर गांव न्यूज वेबसाइट 15 जुलाई की खबर में लिखता है, ''अभी तक संतों की भेष में घूमने वाले 200 से अधिक फर्जी संतों को पकड़ा जा चुका है और 1250 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ हुई है.
बता दें कि 'ऑपरेशन कालनेमि' का नाम रामायण के एक प्रसंग से प्रेरित है, जहां राक्षस कालनेमि ने छद्म रूप धारण कर हनुमान जी को गुमराह करने की कोशिश की थी. लेकिन, हनुमान जी ने उसकी असलियत पहचान ली और उसका अंत कर दिया. मुख्यमंत्री धामी ने एक निजी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि आज भी कई कालनेमि साधु-संतों का भेष बनाकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं. ये लोग सच्चे धर्म की तलाश में आए श्रद्धालुओं को गुमराह करते हैं, उनकी आस्था का शोषण करते हैं और सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंचाते हैं. हमारा उद्देश्य ऐसे लोगों को बेनकाब करना और उन्हें सजा दिलाना है.
क्या है ऑपरेशन कालनेमि?
यह अभियान उन लोगों को निशाना बनाता है जो साधु-संतों का भेष धारण कर लोगों को ठगने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सनातन संस्कृति को बदनाम करने का काम करते हैं. इसके तहत पुलिस और प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए उन लोगों की पहचान शुरू की है जो लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों में शामिल हैं. उत्तराखंड पुलिस ने विभिन्न धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से हरिद्वार, ऋषिकेश और चारधाम यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है. संदिग्ध व्यक्तियों की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो उनके दस्तावेजों, पृष्ठभूमि और गतिविधियों की गहन पड़ताल कर रही हैं.
सीएम धामी ने कहा कि यह अभियान केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है. यह हमारी सनातन संस्कृति, हमारी आस्था और देवभूमि की पवित्रता को संरक्षित करने का एक संकल्प है. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी व्यक्ति धार्मिक आवरण का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने या समाज को नुकसान पहुंचाने में सफल न हो.
आध्यात्मिक नेताओं ने दिया समर्थन
ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि मैं उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 'ऑपरेशन कालनेमि' शुरू करने के लिए धन्यवाद देता हूं. यह अभियान किसी सच्चे साधु या संत के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जो समाज को लूट रहे हैं और धार्मिक भावनाओं का शोषण कर रहे हैं. यह एक बहुत जरूरी कदम है, और सभी को इसका समर्थन करना चाहिए.
स्वामी चिदानंद ने यह भी जोड़ा कि सनातन धर्म की शुद्धता को बनाए रखने के लिए ऐसे कदम समय की मांग हैं. उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और आस्था हमारी सबसे बड़ी ताकत है. इसे दागदार करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए. यह अभियान न केवल ठगों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि सच्चे साधकों और श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित माहौल भी बनाएगा.
सावन और चारधाम यात्रा पर विशेष नजर
बता दें कि सावन का महीना और चारधाम यात्रा उत्तराखंड के लिए विशेष महत्व रखते हैं. इस दौरान लाखों श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के लिए आते हैं. ऐसे में, छद्म साधुओं और ठगों की गतिविधियां श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था के लिए खतरा बन सकती हैं. 'ऑपरेशन कालनेमि' के तहत पुलिस ने इन क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी है. यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है, और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है.
स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों ने भी इस अभियान का स्वागत किया है. हरिद्वार के एक स्थानीय दुकानदार रामलाल शर्मा ने कहा कि कई बार हम देखते हैं कि कुछ लोग साधु के वेश में लोगों को ठगते हैं. इससे न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास टूटता है, बल्कि हमारी संस्कृति को भी नुकसान पहुंचता है. सरकार का यह कदम सराहनीय है.