नई दिल्ली: गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद और सूरत शहरों में अलग-अलग अभियानों में 500 से अधिक अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को हिरासत में लिया है. यह कार्रवाई राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी के आदेश पर शुरू की गई थी, जिसका मकसद गुजरात में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों पर नकेल कसना था. इस अभियान में पुलिस ने सूरत और अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया.
गुजरात पुलिस ने इस कार्रवाई को बहुत सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया. अहमदाबाद में पुलिस ने लगभग 400 लोगों को हिरासत में लिया, जबकि सूरत में 100 से अधिक बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा गया. हिरासत में लिए गए लोगों में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. यह अभियान रात में शुरू हुआ और सुबह तक चला. पुलिस ने इन प्रवासियों को शहर के अलग-अलग हिस्सों से पकड़ा, जहां वे अवैध रूप से रह रहे थे. सूरत में यह कार्रवाई 8 से 10 पुलिस टीमों ने मिलकर की.
इन टीमों में पुलिस के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल थे. उन्होंने शहर के कई इलाकों में तलाशी अभियान चलाया और 100 से अधिक बांग्लादेशी प्रवासियों को हिरासत में लिया. पकड़े गए लोगों को सूरत पुलिस मुख्यालय ले जाया गया, जहां उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उनसे पूछताछ शुरू की गई. सूरत पुलिस के संयुक्त आयुक्त राघवेंद्र वत्स ने इस अभियान के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कई पुलिस टीमों के समन्वित प्रयासों से अवैध प्रवासियों की पहचान की गई. हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि उनकी पहचान और अन्य विवरणों की पुष्टि की जा सके. उन्होंने कहा, "जैसे ही इन लोगों की पहचान पूरी तरह से हो जाएगी, उन्हें जल्द से जल्द बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा."
हिरासत में लिए गए ये बांग्लादेशी प्रवासी गुजरात के सूरत और अहमदाबाद में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे थे. ये लोग शहर के अलग-अलग हिस्सों में बस्तियों या किराए के मकानों में रहते थे. कुछ लोग स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चला रहे थे. हालांकि, उनके पास भारत में रहने के लिए कोई वैध वीजा या अन्य दस्तावेज नहीं थे, जिसके कारण उन्हें अवैध प्रवासी माना गया. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गुजरात में अवैध प्रवास को रोकना और राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना था. गुजरात सरकार और पुलिस का मानना है कि अवैध प्रवासियों की मौजूदगी से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता है. इसलिए, गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने इस तरह की सख्त कार्रवाई का आदेश दिया.
यह अभियान उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे हैं. पुलिस अब हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान की जांच कर रही है. इसके लिए उनके दस्तावेज, अगर कोई हों, और अन्य जानकारी की पड़ताल की जा रही है. साथ ही, बांग्लादेशी अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा ताकि इन लोगों को उनके देश वापस भेजा जा सके. इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में तेजी से काम कर रही है.