नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100वें वर्षगांठ समारोह के लिए पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश के दूतावासों को निमंत्रण नहीं देगा, भले ही यह अन्य राजनयिक मिशनों से संपर्क में है. निमंत्रित लोगों की सूची में अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि, खेल और सांस्कृतिक हस्तियां, विचारक, और स्टार्टअप्स व भारतीय ज्ञान प्रणालियों जैसे उभरते क्षेत्रों के उद्यमी शामिल हैं.
शताब्दी वर्ष का मुख्य आकर्षण दिल्ली में 26 अगस्त से शुरू होने वाला तीन दिवसीय संवाद होगा, जिसका नेतृत्व सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे. यह संवाद संघ के सौ साल के सफर, राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका और "नए क्षितिज" के लिए इसकी दृष्टि पर केंद्रित होगा. भागवत का दिल्ली संबोधन विजयादशमी शताब्दी (2 अक्टूबर) से पहले चार प्रमुख आयोजनों की श्रृंखला का हिस्सा होगा. इसी तरह के संवाद नवंबर में बेंगलुरु, उसके बाद कोलकाता और फिर मुंबई में होंगे. प्रत्येक आयोजन में भागवत के दो दिन के व्याख्यान और तीसरे दिन पूर्व-प्रस्तुत प्रश्न-उत्तर सत्र शामिल होंगे.
दिल्ली का कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 5:30 बजे शुरू होगा और इसमें शताब्दी वर्ष के 'पंच परिवर्तन' (पांच परिवर्तनों) के एजेंडे पर भी चर्चा होगी. भागवत के भारत के भविष्य को औपनिवेशिक मानदंडों के बजाय स्वदेशी ताकतों से आकार देने, विभिन्न क्षेत्रों में अनछुई क्षमताओं और देश की उभरती वैश्विक भूमिका जैसे मुद्दों को छूने की उम्मीद है.
RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर के अनुसार, निमंत्रण सूची में 17 मुख्य श्रेणियां और 138 उप-श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, खेल, कला, मीडिया और बौद्धिक नेतृत्व शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि पूरा देश अपने विकास के सफर में एक साथ आगे बढ़े. हम समाज के सभी वर्गों के साथ संवाद चाहते हैं.
RSS के प्रचार प्रमुख कहा कि कुछ विदेशी मिशनों से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कुछ देशों को बाहर रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि हम कई दूतावासों के संपर्क में हैं, लेकिन मौजूदा संदर्भ में पाकिस्तान को निमंत्रित नहीं किया जाएगा. RSS सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों को भी निमंत्रण नहीं दिया जाएगा. आउटरीच कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी, भाषा संवर्धन और उद्यमिता में युवा नवोन्मेषकों को भी शामिल किया गया है.