इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सांसद पद की शपथ ले रहे थे, उधर जम्मू-कश्मीर से दिल्ली में फोन बजा कि साहब पाकिस्तानी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर आया है, धारा 370 हटाने के बाद से ये पहली बार है, जब पाकिस्तान के नेता हिंदुस्तान के दौरे पर आए हैं और वो भी इस मंशा के साथ किसी तरह भारत हमसे रिश्ते सामान्य कर ले.
इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद गिड़गिड़ा चुके हैं कि प्लीज मोदीजी हमारी मदद कीजिए. भारत से हम रिश्ते सामान्य करना चाहते हैं और ये जो प्रतिनिधमंडल जम्मू-कश्मीर पहुंचा है उसे भी शहबाज ने ही भेजा है. इस प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तान के 5 बड़े विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन्हें बांधों और नदियों की जानकारी लेनी है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सिंधू जल संधि वाले समझौते के प्रतिनिधिमंडल में कुल 38 लोग शामिल हैं, जिसमें पाकिस्तान के 5, फ्रांस-ब्रिटेन के दो-दो, कनाडा के तीन, केन्या, रूस, स्विटजरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और डेनमार्क के एक-एक सदस्य शामिल हैं.
ये संधि 19 सितंबर 1960 को तत्कालीन पीएम नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने की थी. इस संधि के मुताबिक ब्यास, रावी और सतलज नदी के पानी पर भारत का जबकि सिंधु, चिनाब और झेलम पर पाकिस्तान का अधिकार है. इस समझौते में विश्व बैंक को भी हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया था. इसीलिए इस संधि पर कोई भी बात होती है तो दुनियाभर के देश आते हैं.
फरवरी 2024 में रोका गया पानी
इसी साल फरवरी 2024 में भारत ने रावी नदी का पानी जो पाकिस्तान जाता था, उसे पूरी तरह रोक दिया. मोदी सरकार के इस फैसले के बाद से पाकिस्तान के कई इलाकों से पानी के संकट की ख़बरें आने लगी. वहां के 24 बड़े शहरों में पीने का साफ पानी नहीं है. करीब 30 मिलियन लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं. इसीलिए पाकिस्तान अब चाहता है कि सिंधू जल समझौते की सारी शर्तें भारत उसके मुताबिक माने. यहां भी वो चाल चलने की कोशिश कर रहा है.
हर बार चाल चलता रहा है पाक
साल 2017 से 2022 तक सिंधु आयोग की 5 बैठकों में भारत ने कई मुद्दों पर उससे सहमति बनाने की कोशिश की. लेकिन पाकिस्तान हर बार चाल चलता रहा और इस बार जब भारत ने पानी बंद किया तो खुद दौड़ा-दौड़ा आया. इससे पहले पाकिस्तान ने भारत की ओर से किशनगंगा और रतले में बन रहे पनबिजली संयंत्रों पर आपत्ति जताई थी.
पर वो आपत्ति बेबुनियाद थी. जिसमें वर्ल्ड बैंक तक से पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी थी. अब जब सब तरफ से पाकिस्तान थक गया तो ऐसे ही कई मुद्दों पर चर्चा के लिए अब दुनियाभर के कई लोगों को लेकर हिंदुस्तान पहुंचा है.
बड़ी बात ये है कि भारत पाकिस्तान के इस व्यवहार पर गुस्सा करने की बजाय अतिथि देवो भव की नीति अपना रहा है. पाकिस्तान से आए लोगों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने 25 संपर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं.