महाराष्ट्र : मुंबई के घाटकोपर की सड़कों पर अचानक एक ऐसा शख्स नजर आया, जिसे देखकर शायद ही कोई पहचान पाता कि वह कभी इलाके का विधायक रह चुका है. यह शख्स थे बीजेपी के पूर्व विधायक पराग शाह. लेकिन इस बार उनका अंदाज बिल्कुल अलग था. महंगे कपड़ों और राजनीतिक पहचान से दूर पराग शाह ने भिखारी का वेश धारण किया और आम लोगों के बीच निकल पड़े.
उन्होंने घाटकोपर की सड़कों पर घूमकर लोगों से भीख मांगी, हाथ में झाड़ू उठाई और सड़क पर सफाई भी की. इस दौरान उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि जब उनके पास पद, पैसा और पहचान का कोई सहारा न हो, तब आम लोग उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं.
दरअसल, पराग शाह का यह प्रयोग एक जैन मुनि की बात से प्रेरित बताया जा रहा है. जैन मुनि ने उनसे कहा था कि इंसान की पहचान कई बार उसके वैभव और हैसियत से जुड़ जाती है. अगर वही वैभव और पहचान छिन जाए तो शायद परिस्थितियां बिल्कुल बदल जाएं. इसी बात को समझने के लिए पराग शाह ने खुद को आम भिखारी के रूप में देखने का फैसला किया.
जैन मुनि की बात का जिक्र करते हुए यह सवाल भी सामने आया कि अगर किसी व्यक्ति के पास पैसा और रुतबा न हो, तो क्या समाज उसे उसी सम्मान से देखेगा, यहां तक कहा गया कि वैभव खत्म होने पर आपके अपने अपार्टमेंट का वॉचमैन भी आपको पहचानने से इनकार कर सकता है.
पराग शाह इसी अनुभव को खुद महसूस करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपनी पहचान छिपाई और सड़कों पर आम व्यक्ति की तरह समय बिताया. उनका मकसद यह देखना था कि भिखारी के वेश में निकलने पर कितने लोग उन्हें पहचानते हैं और उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं.
इस अनोखे प्रयोग ने एक बार फिर पैसा, पद, पहचान और सामाजिक सम्मान के बीच के रिश्ते पर सवाल खड़ा कर दिया.