नई दिल्ली : देशभर में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही राजनीतिक व सामाजिक बहस के बीच प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने भारत में UCC लागू करने की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह असंभव करार दिया है। मौलाना सुफियान का कहना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में हर समुदाय के अपने पर्सनल लॉ हैं, इसलिए किसी एक कानून को सभी पर थोपने की कोई आवश्यकता नहीं है।
मौलाना सुफियान निजामी ने केंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को UCC लागू करने की कवायद में उलझने के बजाय मुस्लिम समुदाय के वास्तविक विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका तर्क है कि शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति (विरासत) के बंटवारे जैसे निजी मामले वर्षों से पर्सनल कानूनों के तहत हल होते रहे हैं। ऐसे में यदि एक समान नियम थोपने की कोशिश की जाएगी, तो यह विभिन्न समुदायों के धार्मिक और व्यक्तिगत अधिकारों में सीधे दखल की तरह होगा।
UCC के अलावा मौलाना सुफियान ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि CAA से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन पूरी तरह संविधान के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून की तकनीकी बारीकियों को देखना जरूरी है और अगर इसके किसी भी बिंदु पर कोई आपत्तिजनक बात सामने आती है, तो संबंधित कमेटी उसे आधिकारिक रूप से शासन के समक्ष जरूर रखेगी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से यूसीसी को लेकर देश भर में तीखी चर्चाएं जारी हैं। जहां एक पक्ष पूरे देश के नागरिकों के लिए विवाह, उत्तराधिकार और तलाक में समान अधिकार की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे पर्सनल कानूनों की स्वायत्तता का हनन मान रहा है। दारुल उलूम के प्रवक्ता का यह ताजा बयान इसी वैचारिक टकराव की कड़ी में आया है।