50% अमेरिकी टैरिफ की समय सीमा से पहले PM मोदी ने कहा- ''दबाव के बावजूद हम रास्ता निकाल लेंगे''

Amanat Ansari 25 Aug 2025 08:20: PM 1 Mins
50% अमेरिकी टैरिफ की समय सीमा से पहले PM मोदी ने कहा- ''दबाव के बावजूद हम रास्ता निकाल लेंगे''

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 27 अगस्त से लागू होने वाले 50% टैरिफ के सामने मजबूती दिखाई. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी भी आर्थिक दबाव के बावजूद रास्ता निकालेगी. अहमदाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि चाहे जितना दबाव आए, हम अपनी ताकत बढ़ाते रहेंगे. आज आत्मनिर्भर भारत अभियान को गुजरात से बहुत ऊर्जा मिल रही है, और इसके पीछे दो दशकों की मेहनत है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में आर्थिक स्वार्थ पर आधारित नीतियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन भारत ऐसी नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहेगा और अपने नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देगा.

छोटे दुकानदारों, किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्यमियों से बात करते हुए मोदी ने कहा कि गांधी की धरती से मैं बार-बार वादा करता हूं: मेरे लिए आपके हित सबसे महत्वपूर्ण हैं. मेरी सरकार कभी भी छोटे उद्यमियों, पशुपालकों या किसानों को नुकसान नहीं होने देगी. इससे पहले, स्वतंत्रता दिवस के भाषण में पीएम मोदी ने 'स्वदेशी' (मेक इन इंडिया) उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही थी और किसानों व मछुआरों के प्रति एकजुटता दिखाई थी, जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश था. उन्होंने कहा कि मोदी भारत के किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के लिए किसी भी हानिकारक नीति के खिलाफ दीवार की तरह खड़ा है. हम अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेंगे.

इस साल अगस्त में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने की वजह से 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ 50% हो गया. इस अप्रत्याशित कदम से दिल्ली में व्यापार वार्ता अचानक स्थगित हो गई और सितंबर-अक्टूबर में होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर संदेह पैदा हो गया. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि भारत हमारा दोस्त है, लेकिन हमारे व्यापारिक रिश्ते सीमित रहे हैं क्योंकि उनके टैरिफ बहुत अधिक हैं, दुनिया में सबसे ज्यादा और उनके गैर-मौद्रिक व्यापार प्रतिबंध सबसे सख्त हैं.

वाशिंगटन के बढ़ते दबाव के बावजूद, भारत यूके, यूरोपीय संघ, ईएफटीए और आसियान के साथ समानांतर व्यापार वार्ता को आगे बढ़ा रहा है. ऊर्जा संबंधों को मजबूत करके और अमेरिकी संसद में सक्रियता बनाए रखकर, भारत अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी पर भरोसा कर रहा है, जो मौजूदा टैरिफ तनावों को अंततः कम कर सकती है.

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