नई दिल्ली: एक तरफ प्रयागराज में पति-पत्नी और वो पार्ट-2 की शूटिंग चल रही है, शूटिंग सेट पर ही कुछ लोगों ने क्रू मेंबर से मारपीट कर दी तो दूसरी तरफ पति-पत्नी और एक दोस्त की खौफनाक कहानी सामने आई है, प्रयागराज का रहने वाला रणधीर यादव, जो कौड़िहार ब्लॉक का पूर्व जिला पंचायत सदस्य था, जिसकी पत्नी बबली यादव अभी मौजूदा जिला पंचायत सदस्य है, 23 अगस्त को थाने जाकर कहती है मेरे पति लापता हैं, आखिरी बार 22 तारीख को उदय यादव और राम सिंह के साथ एक ढाबे पर गए थे, वहां के बाद से कोई पता नहीं चला.
पुलिस जांच शुरू करती है, अगले दिन यानि 24 अगस्त को चित्रकूट में पुलिस को एक स्कॉर्पियो मिलती है, अब शक की सुई उन दोनों की तरफ घूमती है, क्योंकि यही लोग आखिरी बार उसके साथ थे, पर सवाल था आखिर दोस्त ही दोस्त के साथ ऐसा क्यों करेगा. तो इस कहानी का नैनीताल कनेक्शन खुलता है, पता चलता है, करीब दो महीने पहले उदय यादव, उसकी पत्नी अंजली और रणधीर नैनीताल घूमने गए थे. जहां तीनों ने होटल में एक ही कमरा बुक करवाया, अंजली ने अपने पति को कुछ सामान लाने के लिए बाहर भेजा, और इधर रणधीर के साथ इश्क लड़ाने लगी, जैसे ही उदय लौटा वो पत्नी को दोस्त के साथ आपत्तिजनक हालत में देखकर गुस्से से लाल हो उठा.
लेकिन यहां उसने बदले का प्लान नहीं बनाया, बल्कि जुलाई महीने में उसकी पत्नी अंजलि की बॉडी घर से रहस्यमयी परिस्थितियों में मिलती है, उदय का मानना था रणधीर ने ही इसे अंजाम दिया होगा, अब उदय बदले का प्लान बनाता है, और इसमें अंजलि की मां यानि उसकी सास भी उसका साथ देती है. पर सवाल था प्लान को अंजाम कैसे दिया जाए, क्योंकि कुछ बी सीधे तौर पर करता तो तुरंत पुलिस की गिरफ्त में होता, इसीलिए घटना को अंजाम देने से लेकर सबूत मिटाने तक का प्लान तैयार होता है.
उदय का दोस्त राम सिंह यादव पूछताछ में बताता है, ''22 अगस्त को उदय के कहने पर मैंने रणधीर यादव को चित्रकूट में एक पार्टी में चलने को कहा. नवाबगंज बाजार के एक ढाबे पर हमलोगों ने खाना खाया, शराब पी. रणधीर को इतनी पिलाई कि उसने चित्रकूट जाने से मना कर दिया, हमलोगों ने प्लान के मुताबिक उसे जबरन स्कॉर्पियो में बिठाया. उदय ने उसके सिर पर लोहे के रॉड से वार किया, फिर हमलोगों ने काम तमाम कर दिया. उदय यादव की पत्नी से उसका अवैध संबंध था. वहां से हमलोग बॉडी लेकर बम्होली स्टेशन गए, पहले ट्रैक पर रखा तो एक ट्रेन गुजरी लेकिन मन नहीं भरा तो फिर दोबारा रखा और जब पूरी तरह संतुष्ट हो गए कि अब पहचान नहीं हो पाएगी तो स्कॉर्पियो को जलाने का प्लान बनाया, लेकिन वो एक जंगल में फंस गई तो उसे छोड़कर भाग गए.''
यही स्कॉर्पियो वाली गलती आरोपियों को भारी पड़ी, वहां के डीसीपी कुलदीप गुनावत का दावा है जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन पति-पत्नी और दोस्त की दगाबाजी की कहानी सबको हैरान कर रही है. रिश्तों की खत्म होती मर्यादा और समाज में इस तरीके की बढ़ती घटनाएं आखिर कैसे रोकी जाएं, ये एक बड़ा सवाल बन गया है.